Xossip - Hum bewafa hargiz na the हम बेवफा हरगीज़ न थें

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Re: Xossip - Hum bewafa hargiz na the हम बेवफा हरगीज़ न थें

Postby sexy » 05 Mar 2016 18:55

अप्देत नं ९

योजना सफल हुआ ओर राज फैल हो गया और टोनी पारित हो गया था, राज को थोड़ा बूरा लगा असफल होने पर लेकिन विशु और राज एक वर्ग को आने से खुश था ओर उसी समय से राज और विशु दोनो साथ खेले पड़े और दोनो लंकोटियार हो गए।

अब आगे,

दोनों बचपन में खो जाते हैं।

विशु: याररर मेरीरर एककक खुशीईई केक लिएए तुमनेन अपनेनन एकक सालल बरबादद करर दियायय,मेरी वजहहह से मां से तुमनेनन सूनानन पड़ा।

राज: नहीं विशुउउ मेंइइ जानता हु तुमनेंन क्युयय किया टोनीईई मुझेएए वर्गग मेंमम बहुतत ठंगग करतातत था इसलिएएए तुमनेनन येयय सबब कियायय।

विशु: याररर तुझेझझ केसेसस मालूमम पड़ाअअ?

राज: तू ही तो कहताआ हें मेरे आधेदद दिलल का टुकड़ाअअ तो में क्याअ तेरीइइ हरर दिलल की बात नहींहह जानूगाअअ

ओर दोनो गले मिलते हें

*विशु: अबेबब हठटट ऐसा गले मिल रहा हेंएए तेरीरर होनोवालीइइ भाभीइइ क्यायय सोचेंगीगग मेरेरर बारेरर की मेंइइ समलैंगिक हू,मैंइइ समलैंगिक नहींइइ हु दूरर हठटट ।

राज: गुस्सेसेसे सालेलल तूझेझझ क्यायय लगतातत हें मैं समलैंगिक हू क्यायय ?

ओर सुरु हो जाते दोनो के बीच लड़ना दिशुम दिशुम ओर दोनो ठख जाते हें ।

विशु: राज बस कर यार, राज रुख जाता है

राज: सालेलल तुझेझझ झेलना तो मेरे बस की बात नहीं पता नहींहह भाभीइइ केसे संभाल लेंगीइइ तुझेझझ।

विशु: डर मत तेरीइइ भाभीइइ ऐसेसस धुंद लिखा लूगा मेरे साथ तुझेझझ भी झेल पाईगींइइ।

राज: अबेबब क्यायय बोलल रहा हेंहह

विशु: जो मेरीरर हरकतत सम्भल लेंगीगग तू तो मेरेर से भी कहीं सीधा साधाअअ हेंहह तूउउ , ये बोलकरर जोरर से चिलाता हें अबे आहहह कितनीइइ कोईइइ जोरसेसस मारतातत हें क्यायय

*राज: ऐसासस बकवासस करेंगा तो पितेंगा हीइइ।

विशु: तुझें क्या लगता हें बचपननन में हमारीरर फेलल होने की प्लानिंगग मालूमम हुआ होगागग ?

राज: अरेरर नहीं यारर किसको हमारेरेरे प्लान के बारेरेरे पता नहींहह होगा पर मुझे लगता शायदद माताजी पर हमारेरर पर शकक हुआ होगागग,फेलल होनेनेने पर मुझेझेझे इसस करहह बातत की मुझेझझ नहीं लगता माताजी को भी शकक हुआ होगागा ।

विशु:अच्छाछछ हुआआ मां को नहींहह पताता चलालल वरनानन हमम दोनों हमेशाशश के लिएए अलगग हो जातेतत।

राज: हाअअ यारर माताजी को पतातत चलता तो हमम दोनों अलग हो जातेतत हमेशाशा।

विशु: हा यारर सच्चीचच एकक बातत बोलूउउ कभी अकेलाला मततत चोड़नानन यारर कभी भी मेरी बात का बूरा लगेंइइ खिचकेकक थपड़डड मारनानन मैं बूरारर नहीं मानूंगागा बस मुझेझझ चोड़करकर मतत जानानन

ऐसे में दोनो फिरसे गले मिल जाते हें ऐस ही तोड़ी देरर रहनेनेने परर चलल घरर में सो जातेते हेंहह ओर दोनो घर की तरफ निकल जाते हें पर नशा के कारनन राज के कमरेरे में दोनो करीब ११ बजे सो जातेतत हेंहह।
*
अगले दिन,

दोनो सुबह नौ बजे उठे हैं तो सुरु हो जाता हें सूबह का कार्यक्रम, दोनो का कार्यक्रम होते ही निकल पड़ते हें जिम की ओर राज और विशु दोनो बाइक निकालते हुआ जिम की तरफ निकल जाते हैं, देर होने से जिम में बहुत भीड़ हो गई थीं जेसे तेसे वर्कओउट करके जिम के प्रशिक्षक विजय के पास,

विशु: विजय भाई यार मेरा और राज का आज लास्त दिन हें,आज से मैं सहर से नौ महीना दूर जा रहा हू।

विजय: आप दोनो तो जिम की जान हें केसे हस्सी मज़ाक के साथ कसरत किया आपने पूरा जिम के मोहाल आपने खुशनूमा बनाया हैं।

विशु: धन्यवाद यार अभी हम ९ महीने बाद मिलते हे एक मिनट वो फिलमों में डायलॉग है ना '' हम है राही प्यार के फिर मिलेंगे चलते चलते " ओर बोलकर तीनों हंसने लगते हें ओर राज और विशु निकल पड़ते हें घर की तरफ , यार चल अभी प्राथमिकी अपने कमरा में जाकर दोनों फ्रैश होकर करीब ११ बजे खाने की मेज पर आ जाते हें,

विशु: रामू काका जरा नाश्ता तो ले आना।

रामू काका खाने की मेज पर नाश्ता सर्व करता हें प्राथमिकी दोनों नाश्ता करते हैं , हॉल में बेठ जाके हे ओर पूरा घर को देखने लगते हैं।

विशु: राज केसे कितनी जल्दी १.५ महीने हो गए ना?

राज: हा यार।

विशु: राज ये घर मेरे पिताजी की आखरीर निशानी हैं इस घर में कभी दूर जाने को मन नहीं लगता ओर कुछ समय बात चुप होकर प्राथमिकी बोलता हें यार ये मेरी पिताजी की निसानी को हमेशा संभालकर रखना अगर मैं इस दूनिया में नहीं रहा भी तो।

राज: यार ऐसै क्यूं बोल रहा है ये तेरा घर है ओर तू ही सम्भल लेंगा,

बीच में ठोकते हूए

विशु: राज मुझे बोलने दे यार ये सिर्फ घर नहीं बाल्की पिताजी का आशिवॉर्द है, जीवन का कुछ भरोसा नहीं पता नहीं भगवान क्या खेल दिखाये बस मुझे वादा कर ये घर का ख्याल हमेशा रखेंगा।

राज: मैं वादा करता हु यार इस घर को कुछ नही होने दुंगा ओर इतना ही नहीं तेरे बच्चे के बच्चे भी,बच्चे के बच्चे भी, घर का कुछ नहीं होने देंगे

राज की बात सूनकर विशु हंसने लगता हे, चल अभी बैग पैक करते हें ओर हमारी विशेष दोस्त के घर भीतो जाना हें , दोनो बैग पैक करने के लिए अपने कमरा में चले जाते हें।

नोट: "शराब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं", सावदान १८ उमर या १८ के आसपास शराब बहुत ही ज्यादा खतरनाक हैं ।


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Re: Xossip - Hum bewafa hargiz na the हम बेवफा हरगीज़ न थें

Postby sexy » 05 Mar 2016 18:55

अप्देत नं १०

राज की बात सूनकर विशु हंसने लगता हे, चल अभी बैग पैक करते हें ओर हमारी विशेष दोस्त के घर भीतो जाना हें , दोनो बैग पैक करने के लिए अपने कमरा में चले जाते हें।

अब आगे,

विशु बैग पैक करके राज के कमरे में आ जाता हैं ओर बोलता हैं राज आज हम यहाँ से १२:३० बजे निकल ना है तो ध्यान रख अभी फिर यहाँ नहीं आऐगें, यहाँ से सीधा विशेष दोस्त के घर उसके बाद माँ के पास जाऐंगे , मेने विशेष दोस्त को फोन कर दिया हें हम वहा से दोपहर के भोजन करके विशेष दोस्त के साथ माँ के पास जाऐंगे।

राज: ठीक ओर क्या भूल गया क्या, आज पार्टी दें रहा तू।

विशु: यार,मैं भूला नहीं हू ,आज रात को पार्टी हैं तू टेंशन मत ले ओर हा ओर एक सरप्राईज़ हैं हम दिल्ली कार से जाऐंगे।

राज: अच्छा, क्या कोई ड्राइवर लिया हें क्या ?

विशु: नहीं ड्राइवर तो नहीं हें हमारे पास।

राज: क्या,३५० किलोमीटर दूर हें यहाँ से दिल्ली वाला घर, कार कौन चला आऐंगा ?

विशु: मैं ओर कौन।

राज: पागल हो गया क्या, तुझे इतनी देर तक कार नहीं चलाया हैं , हम उड़ान से जाऐंगे ।

विशु: तो क्या हुआ कार मैं चला लूंगा ओर हा उड़ान हें यहाँ से वो एक घंटे में पहुँचेंगी पर तू जानता ही होगा हमारी विशेष दोस्त को तो टोंडी ऊचाई से भी देखती हैं तो डर जाती हें और हम उड़ान से जान बोलेंगे तो वो सीधा ट्रेन पकड़कर कॉलेज में मिलेंगी ओर माँ के पास भी तो जाना हें यानी दिल्ली तो ट्रेन आज ५ बजें की हें और कल सुबह ६ बजे पहुँचेंगी, वो भी एक्सप्रेस ट्रेन नहीं हें मेल ट्रेन हें दिल्ली के लिए, मेल ट्रेन हें इसे अच्छा तो बस सहीं हें ओर तू जानता हें बस में मुझे असहज महसूस होती हें अगर बस में चलना है तो हम तीन दिन बाद कॉलेज में नहीं बल्की घर में आह आह करके बेठेंगे तुझ तो पूरी कहानी सूना पड़ती हें उफफ ।

राज: ठीक हें,कार से चलते हें लेकिन चालक को लेकर जाऐंगे ।

विशु: यार तू ना पूरी कहानी सूने तक रूकेंगा नहीं इतना जल्दी कौन चालक मिलेंगा तुझे ओर तुझे प्राथमिकी भी संदेह है तो लें चालक किराया को फोन लगाता हू तू ही बात कर ले ।

राज: यार बड़कता था क्यूं हें एक मिनट, हमारी विशेष दोस्त को कब से ऊचाई डर लगने लगा?

विशु: राज बहुत हो गया ओर तेरे सवाल का जवाब नहीं दुंगा, तू खुद पुछ लेना उसे ऊचाई से डर लगता हें या नहीं ओर हा जल्दी कर १२:१५ हो गया हें हमें किसी भी हालत में १ बजे दोस्त के घर पहँचना हैं | राज बोलता यार प्राथमिकी भी मुझें सही नहीं लग रहा हें,देख तुझे इतनी देर तक ड्राइव करने की आदत नहीं हैं ओर आस पास भी हो जाता तो में मान जाता पर बहुत दूर हैं।

विशु: यार तू तनाव मत लें हमनें जूनियर कॉलेज में कार चलाना सीख गए ओर हमें अभी मौका मिल रहा हें इतनी दूर जाने का ओर तू तनाव क्यूं लेता कार ६० किलोमीटर प्रति घंटा की गति में ताला हें

राज: चल ठीक हें, में तोडी देर में प्राथमिकी से कमरे की जांच करके हॉल में आ जाता हू।

ओर विशु वहा से चला जाता हें ओर दिल्ली के घर में फोन लगाता हें, फोन में हरि था,

विशु: हरि मोशाय, मैं विशु बोल रहा हू।

हरि: जी विशु अन्ना (भाई) आप कैसे हो?

विशु: मैं ठीक हू, माँ हें घर पर ?

हरि: नहीं अन्ना मॉल्किन घर पर नहीं हैं ।

विशु: ठीक है, अच्छा मेने इसलिए फोन किया था कल सूबह २-३ बजे तक दिल्ली आ जाऊगा ओर मैं और राज के कमरे के साथ अतिथि कक्ष भी साफ कर लेना ओर माँ को भी बोल देना।

हरि: ठीक हें अन्ना,ओर कुछ अन्ना?

विशु: नहीं ओर कुछ नही तो कल मिलते हें मोशाय।

हरि: ठीक हें अन्ना ओर विशु फोन रख देता हैं।

विशु अपने कमरे से बैग लेकर हॉल में आ जाता हें पर राज अभी तक नहीं आया था, विशु आवाज देता हें नाटु काका, रामू काका चंदा मौसी और तिनों हॉल में आ जाते हें, विशु बोलता हें काका - मौसी आज हम जा रहें हें ओर प्राथमिकी ९ महिने बाद आऐंगे, काका आपके घर वाले को मेरा प्रनाम देना और मौसी आपके बेटे को खुब पड़ने को कहना ओर हा सिर्फ पड़ाई ही नहीं साथ साथ मस्ती भी करने को बोलना ओर आप सब ये घर का पूरा ख्याल रखें , विशु बोल ही रहा राज भी आ जाता हें नीचे बैग लेकर , राज भी बोलता मौसी ओर काका आप घर का पूरा ख्याल रखना।

चंदा मौसी, नाटु काका और रामू काका बोलते हें ठीक बाबा, हम घर का पूरा ख्याल रखेंगे।

विशु बोलता हें राज से चले भाई, राज बोलता हें हा चलो ओर कहते ही पार्किंग क्षेत्र में कार निकालते हें, राज ओर विशु बहार से एक बार घर को देखते हैं , बैग धिक्की में रखकर निकलतें हें पर विशु तो यहाँ भी शरारत करता हें ओर कहता हें यार आज ड्राइविंग तू करेंगा ,मैं और विशेष दोस्त पीछे मस्त मजें में सफ़र का मज़ा लेंगे ओर ये सूनकर राज पूरी तरह से डर जाता हैं।

राज: विशु को ओए मैं नहीं चालक बननेवाला मुझे इतनी दूर जाने का कोई अनुभव नहीं हैं ।

विशु: हस्ते हुए ,यार मैं तो मज़ाक कर रहा था ओर तू गंभीर हो गया हैं ।

राज: तू म़जाक नहीं कर रहा हैं अगर म़जाक करता तो ड्राइवर सीट की तरफ जाता ना की चालक सीट के बाजू में।

विशु: चिल्ल यार मैं तो सिर्फ तुझे हमारे विशेष दोस्त के घर तक के लिए लिफ्ट माँग रहा था, यार तू बहुत जल्दी गंभीर हो जाता हैं।

राज: ऐसा बोल ना दरा दिया फाल्तू का,हमारे विशेष दोस्त के घर तक तो मैं ड्राइवर बनेने के लिए तयार हू इसे आगे तुझे करनी हें।

विशु: ठीक चल अभी पहले ही ये कार ६० किलोमीटर प्रति घंटा की गति के ताला हें ओर समय गुजारें मत कर, विशेष दोस्त के घर से २ बजे निकलना हें ओर यहाँ पर ही तुमने १२:३५ हो गए चल अभी हमें यहाँ से आधा घंटा दूर हें हमारे विशेष दोस्त का घर |

ये कहते ही दोनो कार में बैठकर निकल पड़ते हैं ओर कार मस्तूल अपनी गति से हमारे विशेष दोस्त के घर की तरफ दौड़ रही थी, विशु कार में शान्ती से बेठा था, जानता था की राज को अब बिलकूल स्वतंत्र रूप से ड्राइव के लिए चोड़ देना चाहिए ओर दोनो चुप चाप कार अपनी मंजिल की ओर प्रवेश हो जाती, इसी तरह मानववीस घर से २५ किमी दूर चलें जाते हैं , यहाँ से सिर्फ ५ किमी दूर ही हमारे विशेष दोस्त का घर था गांव से नंसदीक आते ही विष्णु ने विशेष दोस्त को फोन पर संदेश कर दिया की हम रास्ते में हैं, सिर्फ १० मिनट में पहुँच जाऐंगे ओर ऐसे ही हम गावों के सीमा में प्रवेश कर लेते हें वहा का वातावरन बहुत ही शांत ओर हरियाली थी। विशु ने फाटक से जेब से फोन निकालकर सारे माहोल को अपने कैमरा में कैद कर लिया, विशु ने विशेष दोस्त संदेश दे दिया की हम आ गए आपके गांव मेहमान ऩवाजी का पूरी तयार रख लें ओर कुछ ही सेकेंद में उत्तर संदेश आता हें आपका तो कब से इंतजार में हैं और हमारी मेहमान ऩवाजी से मैं आपको कोई शिकायत का मौका नहीं देंगे ओर कुछ ही मिनट में एक बंगला घर प्रकार के पास कार रुखती हैं ओर राज ने सींग को हमारे आने का संदेश मिल गया,

स्पेशल दोस्त का घर,

विशेष दोस्त: माँ तयारी हो गई पूरी ना?

विशेष दोस्त की माँ : हा सब तयारी हो गई हैं , देख कार की सींग की आवाज़ आ गयी, तेरे दोस्त आ गए लगता हैं ।

स्पेशल दोस्त भागकर दरवाजा खुला करती हैं ओर सामने राज और विशु कार से बहार निकल रहें थें। विशु विशेष दोस्त की तरफ देखकर बोलता हैं,ओए कुदिये क्या दिख रहीं हैं सच में यारो पूरी पटाका लग रही हैं।

विशेष दोस्त: उसी अंदाज में यार तू भी मस्त पटाका लग रहा हैं ओर दौड़कर गले मिलती हें ओर राज की तरफ देखकर ओए कबूतर तू भी यहाँ पर हें कभी तो हम दोनों को अकेला चोद दें।

राज: ओए जबान संभालकर रख, मेरा ये तो लंखोटियार हें मैं वहाँ ये वहाँ

विशु: शरारत के मूड में, ओए राज यार तुमने तो आज कमाल कर दिया मेरा ड्राइवर बनकर क्या सुरक्षित कार चला दी।

राज: गुस्से से मन में बोलकर विशु भी न इसके सामने मुझे चालक बोल दिया।

इतना बोलना ही था की विशेष दोस्त की माँ आ गयी ओर राज और विशेष दोस्त के बीच में तिसरा विश्व युद्ध रुख गयी।

राज और विशु दोनो ही विशेष दोस्त की माँ को नमस्ते कहते हैं

विशेषदोस्त की माँ : नमस्ते पुठरर,चलो राज और विशु पुठर घर के अंदर क्या पूरा दिन यहाँ पर ही गुजरना हैं?

इतना कहते ही विशेष दोस्त की माँ, विशु और राज घर को अंदर की तरफ आने लगते हें लेकिन हमारे विशेष दोस्त अंदर नहीं आती ओर मुँह फुलाकर बाहर खड़ी रहती हें ओर विशु हमारी विशेष दोस्त को बहार देखकर बोलता क्यूं आज तुझे अंदर नहीं आना हें क्या ? विशेष दोस्त ये सूनकर ओर जोर से मुँह फुलाकर रकती ओर गुस्से से विशु को देखती हें, यार तू भुल गया मुझे इसलिए अकेला अकेला घर के अंदर जा रहा हें ओर विशु कहता यार तू बुलनेवाली टोड़ी हें ना तू तो हमेशा हमारे साथ हें ओर चल घर के अंदर लेकिन विशेष दोस्त उसकी एक बात नहीं मानती।

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