अध्याय 7: घोड़ी चुदाई
बंसरी ने एक पल की भी देरी नहीं की। टीवी की तरफ नजर करते हुए वह पलंग पर घोड़ी बन गई, ठीक वैसी ही जैसे कोई भूखी रंडी अपने मालिक को ललकार रही हो। उसने अपनी दोनों टांगें पूरी तरह फैला दीं, जिससे उसकी गीली चूत का छेद एकदम खुलकर सामने आ गया। उस छेद से हल्की-हल्की चिपचिपी लर निकल रही थी, जो उसके जांघों पर रिस-रिसकर चमक रही थी।
रोहन का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। यह उसका पहला ही असली संभोग था किसी लड़की के साथ, और अब तीसरा राउंड चल रहा था। विदेशी गोली के असर से उसका लंड अभी भी लोहे की तरह सख्त था, मगर उसकी सांसें पहले से ही हाँफ रही थीं। वह सोच रहा था—‘भगवान, यह सच है? मेरी बीवी… इतनी खूबसूरत, इतनी गर्म… और मैं उसे घोड़ी बनाकर चोद रहा हूँ?’ उसके हाथ काँप रहे थे, मगर उत्साह से उसकी आँखें चमक रही थीं।
रोहन जल्दी से पलंग से नीचे उतरा। कंडोम के पैकेट से आखिरी कंडोम निकाला और फटाक से अपने लंड पर चढ़ा लिया। फिर एक छलांग में पलंग पर चढ़ गया और बंसरी के ठीक पीछे आ गया।
उसने देखा—बंसरी ने दोनों हाथों से पलंग के पैर वाली लकड़ी के उभरे हुए हिस्से को कसकर पकड़ रखा था। कोहनियाँ सीधी थीं, कमर बीच में हल्की-सी झुकी हुई थी, जो एक परफेक्ट कर्व बना रही थी। उसके 32 इंच के भरे-पूरे, भारी स्तन हवा में झूल रहे थे, निप्पल सख्त होकर टंगे हुए थे। उसका पेट बिल्कुल स्लिम था—कमर सिर्फ 24 इंच की—इसलिए घोड़ी बनने पर भी पेट नीचे नहीं लटक रहा था। रोहन ने बहुत इंडियन ब्लू फिल्में देखी थीं, जहाँ भारतीय औरतें घोड़ी बनती थीं तो उनका मोटा पेट लटककर झूलने लगता था। लेकिन बंसरी के साथ ऐसा कुछ नहीं हो रहा था।
रोहन की नजर बार-बार बंसरी के 35 इंच के गोल-मटोल नितंबों पर अटक जाती। वे इतने भरे हुए थे कि आपस में दबकर एक गहरी लकीर बना रहे थे। उसकी चूत की लाल-गुलाबी फाँक पूरी तरह खुली हुई थी, अंदर का गीला मांस चमक रहा था और छोटी-छोटी फुहारें निकल रही थीं। रोहन सोच रहा था, ‘यह पहली बार है जब मैं किसी लड़की को घोड़ी बने उसकी चूत को इस तरह खुला देख रहा हूँ… और वह मेरी बीवी है।’ उसके लंड की नसें फूल गईं, सिर पर एक गर्म लहर दौड़ गई।
बंसरी के 35 इंच के भरे हुए नितंब दो पहाड़ों की तरह उभरे हुए थे, आपस में मिलकर खड़े थे। दोनों टांगें फैली हुई थीं, जिससे चूत का छेद हल्का-सा खुल गया था और अंदर का गुलाबी मांस दिख रहा था।
रोहन ने एक पल की भी देरी नहीं की। अपनी टांगें मोड़कर बंसरी के नितंबों के बीच आ गया और हल्का-सा पीछे होकर पोजीशन चेक की। बंसरी ने परफेक्ट पोजीशन ले रखी थी—जिस पोजीशन में रोहन उसके पीछे आया, उसका लंड सीधा उसके चूत के मुंह पर लग रहा था। साफ पता चल रहा था कि इस रंडी को इन सब चुदाई के तरीकों का बहुत गहरा अनुभव है।
बंसरी के मन में एक हल्की मुस्कान थी। उसके लिए यह लंड कुछ भी नहीं था— मगर वह जानती थी कि आज सुहागरात है। उसे अपने पति को हर सुख देना था, हर पोजीशन में उसे लगाना था कि वह दुनिया का सबसे बड़ा चुदक्कड़ है। इसलिए वह अपनी चूत की मांसपेशियों को जान-बूझकर सिकोड़ रही थी ताकि रोहन को लगे कि उसकी चूत उसे कसकर पकड़ रही है।
रोहन ने बंसरी की कमर को दोनों हाथों से कसकर पकड़ा और एक ही जोरदार झटके में अपना पूरा लंड उसकी चूत में घुसा दिया।
“अह्ह्ह्ह… लाजवाब मेरी संस्कारी छिनाल! इस तरह लंड डालने में तो तू बड़ी परफेक्ट लग रही है, साली रंडी!” रोहन जोर-जोर से हंसते हुए बोला।
जैसे ही लंड अंदर घुसा, रोहन को एक झटका-सा लगा। गर्मी, नमी, और चूत की चिकनाहट… यह अनुभव उसके लिए बिल्कुल नया था। तीसरा राउंड होने के बावजूद गोली के असर से लंड पूरी ताकत से खड़ा था, मगर उसकी सांसें तेज हो गईं। वह काँपते हुए सोच रहा था, ‘ओह माँ… यह कितना गर्म है अंदर… कितना चिकना… जैसे कोई गर्म मक्खन का कुआँ हो।’ उसके घुटने थोड़े कमजोर पड़ गए, लेकिन उत्साह ने उसे संभाल लिया।
बंसरी को तो इस झटके से ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। उसके लिए यह मामूली बात थी। लेकिन अपने पति का दिल रखने के लिए वह मीठे-मीठे स्वर में बोली, “अरे मेरे व्यभिचारी पति… अपनी रंडी पत्नी की इस तरह चुदाई करने में कैसा लग रहा है? बोल ना, मादरचोद… क्या तुझे अपनी बीवी की चूत में लंड डालते हुए बहुत मजा आ रहा है?”
रोहन ने अब जोर-जोर से झटके मारने शुरू कर दिए। हर झटके के साथ उसकी जांघें बंसरी के भरे हुए 35 इंच के नितंबों से टकरातीं और “थप… थप… थप्प… थप्पक…” की आवाज पूरे कमरे में गूंजने लगी। यह आवाज पहले काऊगर्ल पोजीशन में भी आ रही थी, लेकिन इस घोड़ी वाली पोजीशन में वह ध्वनि कुछ और ही मनमोहक, और ज्यादा गंदी लग रही थी।
हर थपाके के साथ रोहन को लग रहा था जैसे उसके लंड की नोक बंसरी की चूत की गहराई तक जा रही है। वह हाँफते हुए सोच रहा था, ‘पहली बार… इतनी गहराई तक… और वह मुझे पूरा ले रही है।’ उसके हाथ बंसरी की कमर को और कसकर पकड़ लेते, नाखून हल्के-हल्के उसके मांस में गड़ जाते। पसीना उसकी पीठ पर बह रहा था, मगर वह रुक नहीं रहा था।
उसकी चूत रोहन के लंड को चूस-चूसकर निचोड़ रही थी। वह हँसते हुए बोली, “अब कैसा लग रहा है मेरे व्यभिचारी हस्बैंड को? बोल ना, मादरचोद… तेरी रंडी बीवी की चूत तुझे कितना सुख दे रही है?”
रोहन तेज-तेज झटके मारते हुए गालियों की बौछार करने लगा, “साली कुत्ती! लंड की पुजारन वेश्या! तेरी माँ का भोसड़ा! साली छिनाल! बहनचोद रंडी! तू तो जन्म-जन्म की चुदाई की भूखी है! तेरी चूत तो किसी भी लंड को निगल लेती है, साली गंदी माँ की बेटी! हरामखोर की औलाद! तू मेरी बीवी बनकर भी सड़क की रंडी बनी हुई है!”
हर गाली के साथ रोहन का उत्साह बढ़ता जा रहा था। तीसरा राउंड होने के बावजूद उसे लग रहा था कि वह कभी थक नहीं सकता। उसका लंड बंसरी की चूत में बार-बार घुस-घुसकर निकल रहा था, कंडोम के ऊपर चूत का रस चमक रहा था। वह सोच रहा था, ‘यह मेरी बीवी है… और मैं उसे इस तरह चोद रहा हूँ… जैसे कोई पोर्न स्टार।’
बंसरी भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “हाँ… हाँ… और तेज मार रे मादरचोद! तेरी बीवी की चूत फाड़ दे आज! साले व्यभिचारी पति… तू भी तो किसी दूसरे की बीवी को चोदने का सपना देखता है ना? बोल… बोल ना… तेरी रंडी बीवी को चोदते हुए तुझे कितना मजा आ रहा है?”
यह बोलकर बंसरी भी अब अपनी कमर को हल्का-हल्का आगे-पीछे हिलाने लगी।
रोहन हाँफते हुए बोला, “कुलटा बंसरी… जब भी सोचता हूँ कि यह तेरा सबसे बेहतर तरीका है चुदाई करने का, तू उसे बेकार कर देती है और मुझे उससे भी ज्यादा बेहतर सुख दे देती है। मुझे तो लगता है पुराने जन्म में तू वैशाली साम्राज्य की आम्रपाली रही होगी, जिसने हजारों मर्दों के हर किस्म के लंड को अपनी चूत में उतारा होगा। और इस जन्म में फिर वही काम कर रही है, साली महारानी रंडी!”
रोहन के हर झटके के साथ बंसरी की चूत से ‘चुर्र… चुर्र…’ की चिकनी आवाज निकल रही थी। उसके भारी स्तन जोर-जोर से झूल रहे थे, निप्पल हवा में घूम रहे थे। रोहन एक हाथ आगे बढ़ाकर एक स्तन को कसकर दबा लेता, निप्पल को उँगलियों से मसलता।
फिर उसने पूछा, “बोल ना बहनचोद… मेरी सुंदर धर्मपत्नी… इस पोजीशन में तेरी चूत की चुदाई पहली बार किसने की थी? बोल साली… कौन था वो भाग्यशाली मादरचोद जिसने तुझे सबसे पहले घोड़ी बनाकर चोदा था?”
बंसरी मुस्कुराते हुए सच बोल दी, क्योंकि उसे पता था रोहन को सब कल्पना लग रही है, “अरे मेरे पड़ोस में एक भैया रहते थे… उन्होंने ही तुम्हारी इस संस्कारी वेश्या पत्नी की चूत की चुदाई इस पोजीशन में की थी… पहले बार उन्होंने ही मुझे घोड़ी बनाकर इतना जोर से चोदा था कि मैं चीख-चीखकर रह गई थी!”
बंसरी के मुंह से यह बात सुनकर रोहन का लंड और सख्त हो गया। वह और तेज झटके मारने लगा, जैसे उस पड़ोसी से जल रहा हो। “साली… तो तू पहले से ही घोड़ी बनना जानती थी? आज मैं तुझे उससे भी ज्यादा जोर से चोदूँगा!”
दोनों के बीच अब तक पूरे दस मिनट हो चुके थे। बंसरी ने रोहन को रोक दिया। फिर वह पलंग के बीचों-बीच लेट गई, अपने दोनों पैरों को ऊपर उठाकर अपने स्तनों पर सीधा कर लिया—घुटने कानों तक मोड़कर। फिर रोहन को अपने ऊपर चढ़ा लिया। रोहन तुरंत इस नए पोजीशन में घुस गया और जोर-जोर से चूत पर झटके मारने लगा।
यह पोजीशन रोहन के लिए और भी नया और गहरा था। बंसरी की चूत अब पूरी तरह ऊपर की तरफ खुली थी, और हर झटके में लंड की जड़ तक घुस रहा था। रोहन की सांसें फूल रही थीं, पसीने की बूँदें बंसरी के स्तनों पर गिर रही थीं। वह सोच रहा था, ‘तीसरा राउंड… और अभी भी इतना मजा… यह गोली जादू है!’
वह हँसते हुए बोला, “मुझे लगता है जब मैं पगफेरे की रस्म के लिए तेरे घर जाऊंगा तो उस पड़ोसी भैया से जरूर मिलना चाहिए। देखना चाहिए कि वो आदमी कैसा दिखता है जिसने मेरी बीवी को इस तरह चोदा है। और उसे शुक्रिया भी अदा करना चाहिए… उसने मेरी बीवी को इतना कुछ सिखाया है, साली रंडी!”
बोलकर रोहन जोर-जोर से हँसने लगा और बंसरी के होंठों को चूसने लगा। बारह मिनट तक इस पोजीशन में चोदने के बाद बंसरी ने रोहन को अपने ऊपर से हटा दिया। फिर वह करवट लेकर लेट गई, एक टांग ऊपर उठा दी। रोहन को भी करवट लेकर लेटने को कहा। उसकी जांघों के नीचे तकिया रखकर अपनी चूत में रोहन का पूरा लंड ले लिया और फिर से उसे किस करने लगी।
रोहन भी उसे चूमते हुए कमर हिलाकर चोद रहा था। यह सब लगभग दस मिनट तक चला। इस पोजीशन में लंड थोड़ा अलग एंगल से घुस रहा था, जिससे रोहन को हर बार नई सनसनी हो रही थी। वह बंसरी की गर्दन चूसता, उसके कान में फुसफुसाता, “मेरी रंडी… तू मुझे पागल कर देगी…”
अब तक कुल बत्तीस मिनट चुदाई हो चुकी थी—दूसरे राउंड के बराबर। लेकिन रोहन ने वो विदेशी गोली खाई थी, इसलिए बंसरी जानती थी कि आखिरी पोजीशन में रोहन पूरी ताकत लगाएगा।
वह इसे यादगार बनाना चाहती थी।
बंसरी ने रोहन का हाथ पकड़कर उसे पलंग से नीचे उतार लिया। अपनी पीठ दीवार पर टिकाई, एक टांग (उल्टी वाली) मेज पर रख दी, और सीधी टांग के नीचे एक छोटा-सा लकड़ी का तख्ता रख दिया ताकि लंड के लिए परफेक्ट एंगल बने।
फिर रोहन ने सीधी जांघ के नीचे अपना हाथ रखकर पीछे दीवार में घुसा हुआ हुक पकड़ लिया, और उल्टी तरफ की कमर से दूसरा हुक पकड़ लिया। दरअसल ये हुक पुरानी हवेली में पहले से लगे थे। बंसरी ने दिन में ही इन्हें देखकर अपनी चुदाई के लिए प्लान बना लिया था।
अभी तक रोहन का लंड उसकी चूत में नहीं गया था।
बंसरी ने आँखें मिचकाते हुए कहा, “डार्लिंग… अब तुम्हें अपनी पूरी ताकत से मेरी चूत में झटके मारने हैं। मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे वो आनंद दो जो मुझे और मर्दों ने दिया है… जिससे मैं उन सबके सामने कह सकूँ कि मेरा पति सबसे कहीं ज्यादा बेहतर है… सबसे बड़ा बीवीचोद है!”
रोहन ने देर नहीं की। अपना लंड बंसरी की चूत में डाला और पूरी ताकत से तेज-तेज झटके मारने लगा। वह इतनी जोर से मार रहा था कि दोनों हुकों को कसकर पकड़ रखा था—उसकी हाथों की नसें उभर आई थीं। साथ ही वह बंसरी के दोनों होंठों को चूस रहा था।
इस स्टैंडिंग पोजीशन में हर झटका बंसरी की चूत में जा रहा था। रोहन की जांघें बंसरी की जांघों से टकरा रही थीं, ‘पटाक… पटाक…’ की आवाज गूंज रही थी। रोहन की आँखें बंद थीं, मुँह से सिर्फ हाँफने और गालियाँ निकल रही थीं। तीसरा राउंड होने के बावजूद उसे लग रहा था कि वह स्वर्ग में है—उसकी सुहागरात, उसकी बीवी, और यह अनोखा तरीका।
बंसरी भी उसे जोर से किस कर रही थी, उसके हर झटके को झेल रही थी। उसके अंदर से गहरी सिसकारियाँ निकल रही थीं, “हाँ… हाँ… और तेज… और तेज रे मादरचोद… फाड़ डाल मेरी चूत आज!”
लेकिन अपने अनुभव से बंसरी जानती थी—उसका पति अच्छा झटका मार रहा था, पर अगर वह रैंकिंग दे तो रोहन का नंबर 50 से 100 के बीच ही आएगा। अगर वह खुद झटके मारता तो अनाड़ी पति की रैंक 220 के बाद होती। फिर भी वह चीख रही थी, अपनी चूत को सिकोड़ रही थी, रोहन को लग रहा था कि वह दुनिया का सबसे ताकतवर चुदक्कड़ है।
इसी पोजीशन में लगातार चुदाई करते हुए लगभग चौदह मिनट बाद रोहन का पूरा शरीर काँपने लगा। वह जोर-जोर से चीखने लगा। बंसरी ने उसे कसकर पकड़ लिया और उसे झड़ने दिया।
रोहन को लग रहा था कि उसके शरीर की सारी ऊर्जा उसके लंड के जरिए बंसरी की चूत में कंडोम के अंदर जा रही है। वह पूरी तरह खाली, निहाल, थका हुआ महसूस कर रहा था—जैसे शरीर में जान ही न बची हो। उसकी आँखों के सामने तारे चमक रहे थे, घुटने काँप रहे थे।
बंसरी ने प्यार से पूछा, “मेरी जान… यह वाला कैसा रहा?”
रोहन हाँफते हुए बोला, “मेरे पास तारीफ के लिए शब्द ही नहीं हैं… तुम हर बार मुझे और ज्यादा सुख दे रही हो… साली… तू तो सच में मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी रंडी है… और मैं तेरा सबसे बड़ा मादरचोद पति!”
दोनों एक-दूसरे को कसकर चूमते हुए हँस पड़े। सुहागरात की आखिरी चूत की चुदाई… यादगार हो चुकी थी।