अध्याय 7: घोड़ी चुदाई
बंसरी ने एक पल की भी देरी नहीं की। टीवी की तरफ नजर करते हुए वह पलंग पर घोड़ी बन गई, ठीक वैसी ही जैसे कोई भूखी रंडी अपने मालिक को ललकार रही हो। उसने अपनी दोनों टांगें पूरी तरह फैला दीं, जिससे उसकी गीली चूत का छेद एकदम खुलकर सामने आ गया। उस छेद से हल्की-हल्की चिपचिपी लर निकल रही थी, जो उसके जांघों पर रिस-रिसकर चमक रही थी।
रोहन का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। यह उसका पहला ही असली संभोग था किसी लड़की के साथ, और अब तीसरा राउंड चल रहा था। विदेशी गोली के असर से उसका लंड अभी भी लोहे की तरह सख्त था, मगर उसकी सांसें पहले से ही हाँफ रही थीं। वह सोच रहा था—‘भगवान, यह सच है? मेरी बीवी… इतनी खूबसूरत, इतनी गर्म… और मैं उसे घोड़ी बनाकर चोद रहा हूँ?’ उसके हाथ काँप रहे थे, मगर उत्साह से उसकी आँखें चमक रही थीं।
रोहन जल्दी से पलंग से नीचे उतरा। कंडोम के पैकेट से आखिरी कंडोम निकाला और फटाक से अपने लंड पर चढ़ा लिया। फिर एक छलांग में पलंग पर चढ़ गया और बंसरी के ठीक पीछे आ गया।
उसने देखा—बंसरी ने दोनों हाथों से पलंग के पैर वाली लकड़ी के उभरे हुए हिस्से को कसकर पकड़ रखा था। कोहनियाँ सीधी थीं, कमर बीच में हल्की-सी झुकी हुई थी, जो एक परफेक्ट कर्व बना रही थी। उसके 32 इंच के भरे-पूरे, भारी स्तन हवा में झूल रहे थे, निप्पल सख्त होकर टंगे हुए थे। उसका पेट बिल्कुल स्लिम था—कमर सिर्फ 24 इंच की—इसलिए घोड़ी बनने पर भी पेट नीचे नहीं लटक रहा था। रोहन ने बहुत इंडियन ब्लू फिल्में देखी थीं, जहाँ भारतीय औरतें घोड़ी बनती थीं तो उनका मोटा पेट लटककर झूलने लगता था। लेकिन बंसरी के साथ ऐसा कुछ नहीं हो रहा था।
रोहन की नजर बार-बार बंसरी के 35 इंच के गोल-मटोल नितंबों पर अटक जाती। वे इतने भरे हुए थे कि आपस में दबकर एक गहरी लकीर बना रहे थे। उसकी चूत की लाल-गुलाबी फाँक पूरी तरह खुली हुई थी, अंदर का गीला मांस चमक रहा था और छोटी-छोटी फुहारें निकल रही थीं। रोहन सोच रहा था, ‘यह पहली बार है जब मैं किसी लड़की को घोड़ी बने उसकी चूत को इस तरह खुला देख रहा हूँ… और वह मेरी बीवी है।’ उसके लंड की नसें फूल गईं, सिर पर एक गर्म लहर दौड़ गई।
बंसरी के 35 इंच के भरे हुए नितंब दो पहाड़ों की तरह उभरे हुए थे, आपस में मिलकर खड़े थे। दोनों टांगें फैली हुई थीं, जिससे चूत का छेद हल्का-सा खुल गया था और अंदर का गुलाबी मांस दिख रहा था।
रोहन ने एक पल की भी देरी नहीं की। अपनी टांगें मोड़कर बंसरी के नितंबों के बीच आ गया और हल्का-सा पीछे होकर पोजीशन चेक की। बंसरी ने परफेक्ट पोजीशन ले रखी थी—जिस पोजीशन में रोहन उसके पीछे आया, उसका लंड सीधा उसके चूत के मुंह पर लग रहा था। साफ पता चल रहा था कि इस रंडी को इन सब चुदाई के तरीकों का बहुत गहरा अनुभव है।
बंसरी के मन में एक हल्की मुस्कान थी। उसके लिए यह लंड कुछ भी नहीं था— मगर वह जानती थी कि आज सुहागरात है। उसे अपने पति को हर सुख देना था, हर पोजीशन में उसे लगाना था कि वह दुनिया का सबसे बड़ा चुदक्कड़ है। इसलिए वह अपनी चूत की मांसपेशियों को जान-बूझकर सिकोड़ रही थी ताकि रोहन को लगे कि उसकी चूत उसे कसकर पकड़ रही है।
रोहन ने बंसरी की कमर को दोनों हाथों से कसकर पकड़ा और एक ही जोरदार झटके में अपना पूरा लंड उसकी चूत में घुसा दिया।
“अह्ह्ह्ह… लाजवाब मेरी संस्कारी छिनाल! इस तरह लंड डालने में तो तू बड़ी परफेक्ट लग रही है, साली रंडी!” रोहन जोर-जोर से हंसते हुए बोला।
जैसे ही लंड अंदर घुसा, रोहन को एक झटका-सा लगा। गर्मी, नमी, और चूत की चिकनाहट… यह अनुभव उसके लिए बिल्कुल नया था। तीसरा राउंड होने के बावजूद गोली के असर से लंड पूरी ताकत से खड़ा था, मगर उसकी सांसें तेज हो गईं। वह काँपते हुए सोच रहा था, ‘ओह माँ… यह कितना गर्म है अंदर… कितना चिकना… जैसे कोई गर्म मक्खन का कुआँ हो।’ उसके घुटने थोड़े कमजोर पड़ गए, लेकिन उत्साह ने उसे संभाल लिया।
बंसरी को तो इस झटके से ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। उसके लिए यह मामूली बात थी। लेकिन अपने पति का दिल रखने के लिए वह मीठे-मीठे स्वर में बोली, “अरे मेरे व्यभिचारी पति… अपनी रंडी पत्नी की इस तरह चुदाई करने में कैसा लग रहा है? बोल ना, मादरचोद… क्या तुझे अपनी बीवी की चूत में लंड डालते हुए बहुत मजा आ रहा है?”
रोहन ने अब जोर-जोर से झटके मारने शुरू कर दिए। हर झटके के साथ उसकी जांघें बंसरी के भरे हुए 35 इंच के नितंबों से टकरातीं और “थप… थप… थप्प… थप्पक…” की आवाज पूरे कमरे में गूंजने लगी। यह आवाज पहले काऊगर्ल पोजीशन में भी आ रही थी, लेकिन इस घोड़ी वाली पोजीशन में वह ध्वनि कुछ और ही मनमोहक, और ज्यादा गंदी लग रही थी।
हर थपाके के साथ रोहन को लग रहा था जैसे उसके लंड की नोक बंसरी की चूत की गहराई तक जा रही है। वह हाँफते हुए सोच रहा था, ‘पहली बार… इतनी गहराई तक… और वह मुझे पूरा ले रही है।’ उसके हाथ बंसरी की कमर को और कसकर पकड़ लेते, नाखून हल्के-हल्के उसके मांस में गड़ जाते। पसीना उसकी पीठ पर बह रहा था, मगर वह रुक नहीं रहा था।
उसकी चूत रोहन के लंड को चूस-चूसकर निचोड़ रही थी। वह हँसते हुए बोली, “अब कैसा लग रहा है मेरे व्यभिचारी हस्बैंड को? बोल ना, मादरचोद… तेरी रंडी बीवी की चूत तुझे कितना सुख दे रही है?”
रोहन तेज-तेज झटके मारते हुए गालियों की बौछार करने लगा, “साली कुत्ती! लंड की पुजारन वेश्या! तेरी माँ का भोसड़ा! साली छिनाल! बहनचोद रंडी! तू तो जन्म-जन्म की चुदाई की भूखी है! तेरी चूत तो किसी भी लंड को निगल लेती है, साली गंदी माँ की बेटी! हरामखोर की औलाद! तू मेरी बीवी बनकर भी सड़क की रंडी बनी हुई है!”
हर गाली के साथ रोहन का उत्साह बढ़ता जा रहा था। तीसरा राउंड होने के बावजूद उसे लग रहा था कि वह कभी थक नहीं सकता। उसका लंड बंसरी की चूत में बार-बार घुस-घुसकर निकल रहा था, कंडोम के ऊपर चूत का रस चमक रहा था। वह सोच रहा था, ‘यह मेरी बीवी है… और मैं उसे इस तरह चोद रहा हूँ… जैसे कोई पोर्न स्टार।’
बंसरी भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “हाँ… हाँ… और तेज मार रे मादरचोद! तेरी बीवी की चूत फाड़ दे आज! साले व्यभिचारी पति… तू भी तो किसी दूसरे की बीवी को चोदने का सपना देखता है ना? बोल… बोल ना… तेरी रंडी बीवी को चोदते हुए तुझे कितना मजा आ रहा है?”
यह बोलकर बंसरी भी अब अपनी कमर को हल्का-हल्का आगे-पीछे हिलाने लगी।
रोहन हाँफते हुए बोला, “कुलटा बंसरी… जब भी सोचता हूँ कि यह तेरा सबसे बेहतर तरीका है चुदाई करने का, तू उसे बेकार कर देती है और मुझे उससे भी ज्यादा बेहतर सुख दे देती है। मुझे तो लगता है पुराने जन्म में तू वैशाली साम्राज्य की आम्रपाली रही होगी, जिसने हजारों मर्दों के हर किस्म के लंड को अपनी चूत में उतारा होगा। और इस जन्म में फिर वही काम कर रही है, साली महारानी रंडी!”
रोहन के हर झटके के साथ बंसरी की चूत से ‘चुर्र… चुर्र…’ की चिकनी आवाज निकल रही थी। उसके भारी स्तन जोर-जोर से झूल रहे थे, निप्पल हवा में घूम रहे थे। रोहन एक हाथ आगे बढ़ाकर एक स्तन को कसकर दबा लेता, निप्पल को उँगलियों से मसलता।
फिर उसने पूछा, “बोल ना बहनचोद… मेरी सुंदर धर्मपत्नी… इस पोजीशन में तेरी चूत की चुदाई पहली बार किसने की थी? बोल साली… कौन था वो भाग्यशाली मादरचोद जिसने तुझे सबसे पहले घोड़ी बनाकर चोदा था?”
बंसरी मुस्कुराते हुए सच बोल दी, क्योंकि उसे पता था रोहन को सब कल्पना लग रही है, “अरे मेरे पड़ोस में एक भैया रहते थे… उन्होंने ही तुम्हारी इस संस्कारी वेश्या पत्नी की चूत की चुदाई इस पोजीशन में की थी… पहले बार उन्होंने ही मुझे घोड़ी बनाकर इतना जोर से चोदा था कि मैं चीख-चीखकर रह गई थी!”
बंसरी के मुंह से यह बात सुनकर रोहन का लंड और सख्त हो गया। वह और तेज झटके मारने लगा, जैसे उस पड़ोसी से जल रहा हो। “साली… तो तू पहले से ही घोड़ी बनना जानती थी? आज मैं तुझे उससे भी ज्यादा जोर से चोदूँगा!”
दोनों के बीच अब तक पूरे दस मिनट हो चुके थे। बंसरी ने रोहन को रोक दिया। फिर वह पलंग के बीचों-बीच लेट गई, अपने दोनों पैरों को ऊपर उठाकर अपने स्तनों पर सीधा कर लिया—घुटने कानों तक मोड़कर। फिर रोहन को अपने ऊपर चढ़ा लिया। रोहन तुरंत इस नए पोजीशन में घुस गया और जोर-जोर से चूत पर झटके मारने लगा।
यह पोजीशन रोहन के लिए और भी नया और गहरा था। बंसरी की चूत अब पूरी तरह ऊपर की तरफ खुली थी, और हर झटके में लंड की जड़ तक घुस रहा था। रोहन की सांसें फूल रही थीं, पसीने की बूँदें बंसरी के स्तनों पर गिर रही थीं। वह सोच रहा था, ‘तीसरा राउंड… और अभी भी इतना मजा… यह गोली जादू है!’
वह हँसते हुए बोला, “मुझे लगता है जब मैं पगफेरे की रस्म के लिए तेरे घर जाऊंगा तो उस पड़ोसी भैया से जरूर मिलना चाहिए। देखना चाहिए कि वो आदमी कैसा दिखता है जिसने मेरी बीवी को इस तरह चोदा है। और उसे शुक्रिया भी अदा करना चाहिए… उसने मेरी बीवी को इतना कुछ सिखाया है, साली रंडी!”
बोलकर रोहन जोर-जोर से हँसने लगा और बंसरी के होंठों को चूसने लगा। बारह मिनट तक इस पोजीशन में चोदने के बाद बंसरी ने रोहन को अपने ऊपर से हटा दिया। फिर वह करवट लेकर लेट गई, एक टांग ऊपर उठा दी। रोहन को भी करवट लेकर लेटने को कहा। उसकी जांघों के नीचे तकिया रखकर अपनी चूत में रोहन का पूरा लंड ले लिया और फिर से उसे किस करने लगी।
रोहन भी उसे चूमते हुए कमर हिलाकर चोद रहा था। यह सब लगभग दस मिनट तक चला। इस पोजीशन में लंड थोड़ा अलग एंगल से घुस रहा था, जिससे रोहन को हर बार नई सनसनी हो रही थी। वह बंसरी की गर्दन चूसता, उसके कान में फुसफुसाता, “मेरी रंडी… तू मुझे पागल कर देगी…”
अब तक कुल बत्तीस मिनट चुदाई हो चुकी थी—दूसरे राउंड के बराबर। लेकिन रोहन ने वो विदेशी गोली खाई थी, इसलिए बंसरी जानती थी कि आखिरी पोजीशन में रोहन पूरी ताकत लगाएगा।
वह इसे यादगार बनाना चाहती थी।
बंसरी ने रोहन का हाथ पकड़कर उसे पलंग से नीचे उतार लिया। अपनी पीठ दीवार पर टिकाई, एक टांग (उल्टी वाली) मेज पर रख दी, और सीधी टांग के नीचे एक छोटा-सा लकड़ी का तख्ता रख दिया ताकि लंड के लिए परफेक्ट एंगल बने।
फिर रोहन ने सीधी जांघ के नीचे अपना हाथ रखकर पीछे दीवार में घुसा हुआ हुक पकड़ लिया, और उल्टी तरफ की कमर से दूसरा हुक पकड़ लिया। दरअसल ये हुक पुरानी हवेली में पहले से लगे थे। बंसरी ने दिन में ही इन्हें देखकर अपनी चुदाई के लिए प्लान बना लिया था।
अभी तक रोहन का लंड उसकी चूत में नहीं गया था।
बंसरी ने आँखें मिचकाते हुए कहा, “डार्लिंग… अब तुम्हें अपनी पूरी ताकत से मेरी चूत में झटके मारने हैं। मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे वो आनंद दो जो मुझे और मर्दों ने दिया है… जिससे मैं उन सबके सामने कह सकूँ कि मेरा पति सबसे कहीं ज्यादा बेहतर है… सबसे बड़ा बीवीचोद है!”
रोहन ने देर नहीं की। अपना लंड बंसरी की चूत में डाला और पूरी ताकत से तेज-तेज झटके मारने लगा। वह इतनी जोर से मार रहा था कि दोनों हुकों को कसकर पकड़ रखा था—उसकी हाथों की नसें उभर आई थीं। साथ ही वह बंसरी के दोनों होंठों को चूस रहा था।
इस स्टैंडिंग पोजीशन में हर झटका बंसरी की चूत में जा रहा था। रोहन की जांघें बंसरी की जांघों से टकरा रही थीं, ‘पटाक… पटाक…’ की आवाज गूंज रही थी। रोहन की आँखें बंद थीं, मुँह से सिर्फ हाँफने और गालियाँ निकल रही थीं। तीसरा राउंड होने के बावजूद उसे लग रहा था कि वह स्वर्ग में है—उसकी सुहागरात, उसकी बीवी, और यह अनोखा तरीका।
बंसरी भी उसे जोर से किस कर रही थी, उसके हर झटके को झेल रही थी। उसके अंदर से गहरी सिसकारियाँ निकल रही थीं, “हाँ… हाँ… और तेज… और तेज रे मादरचोद… फाड़ डाल मेरी चूत आज!”
लेकिन अपने अनुभव से बंसरी जानती थी—उसका पति अच्छा झटका मार रहा था, पर अगर वह रैंकिंग दे तो रोहन का नंबर 50 से 100 के बीच ही आएगा। अगर वह खुद झटके मारता तो अनाड़ी पति की रैंक 220 के बाद होती। फिर भी वह चीख रही थी, अपनी चूत को सिकोड़ रही थी, रोहन को लग रहा था कि वह दुनिया का सबसे ताकतवर चुदक्कड़ है।
इसी पोजीशन में लगातार चुदाई करते हुए लगभग चौदह मिनट बाद रोहन का पूरा शरीर काँपने लगा। वह जोर-जोर से चीखने लगा। बंसरी ने उसे कसकर पकड़ लिया और उसे झड़ने दिया।
रोहन को लग रहा था कि उसके शरीर की सारी ऊर्जा उसके लंड के जरिए बंसरी की चूत में कंडोम के अंदर जा रही है। वह पूरी तरह खाली, निहाल, थका हुआ महसूस कर रहा था—जैसे शरीर में जान ही न बची हो। उसकी आँखों के सामने तारे चमक रहे थे, घुटने काँप रहे थे।
बंसरी ने प्यार से पूछा, “मेरी जान… यह वाला कैसा रहा?”
रोहन हाँफते हुए बोला, “मेरे पास तारीफ के लिए शब्द ही नहीं हैं… तुम हर बार मुझे और ज्यादा सुख दे रही हो… साली… तू तो सच में मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी रंडी है… और मैं तेरा सबसे बड़ा मादरचोद पति!”
दोनों एक-दूसरे को कसकर चूमते हुए हँस पड़े। सुहागरात की आखिरी चूत की चुदाई… यादगार हो चुकी थी।
बंसरी का जीवन 1
बंसरी का जीवन 8
अध्याय 8: प्रेम की अनंत मिठास
उस भव्य शयनकक्ष में, जहाँ हर कोना चंदन की महक और मोमबत्तियों की हल्की-हल्की खुशबू से भरा हुआ था, रोहन का शरीर पूरा खाली हो गया था। जैसे कोई तूफ़ान गुज़रकर चला गया हो और समुद्र की सारी लहरें शांत हो गई हों, वैसे ही उसकी सारी ऊर्जा, सारी ताकत, सारी जवानी उस रात की उन्मादपूर्ण चुदाई में समा चुकी थी। उसका हर मांसपेशी थकान से काँप रहा था, उसकी छाती भारी-भारी हो रही थी और उसकी साँसें इतनी धीमी थीं कि लगता था जैसे कोई पुराना घाव धीरे-धीरे भर रहा हो। बंसरी ने उसे अपनी कोमल, गर्म बाहों में थामे हुए रखा। उसकी बाहें न सिर्फ़ प्यार से भरी थीं, बल्कि अनुभव की गहराई से भी मजबूत थीं—जैसे कोई प्राचीन देवी अपने भक्त को सहारा दे रही हो, जैसे कोई अनुभवी रानी अपने राजा को उसके युद्ध के बाद सँभाल रही हो। एयर-कंडीशनर की ठंडी हवा धीरे-धीरे उनके पसीने से तर शरीरों को छू रही थी, उसकी ठंडक उनकी गर्म त्वचा पर सिहरन पैदा कर रही थी, और दूर कहीं घड़ी की सुइयाँ 12:30 बजा रही थीं, उनकी टिक-टिक की आवाज़ कमरे की भव्यता में गूँज रही थी।
बंसरी ने उसे अपने आप से चिपकाए हुए पलंग के पास ले आई, और उसे लिटा दिया। उसका स्पर्श इतना कोमल था कि रोहन को लगा जैसे कोई रेशमी चादर उसके थके हुए शरीर को ढक रही हो, जैसे कोई माँ अपने बच्चे को सुला रही हो, परंतु यह माँ का स्पर्श नहीं, बल्कि प्रेमिका का, पत्नी का, कामुक देवी का स्पर्श था। रोहन पूरी तरह से थक गया था, इसीलिए जैसे ही बंसरी उसे पलंग के पास लाई, वह तुरंत पेट के बल लेट गया और अपनी आँखें बंद कर ली। उसके शरीर में बहुत कमजोरी महसूस हो रही थी, उसे ऐसा लग रहा था कि उसमें अभी जान बची ही नहीं है। उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी, लेकिन बहुत धीरे-धीरे, जैसे कोई पुराना घाव भर रहा हो, जैसे कोई तूफ़ान के बाद का समुद्र धीरे-धीरे शांत हो रहा हो।
बंसरी नीचे झुकी और रोहन की दोनों टांगों को अपने हाथों से फैला दिया, जिससे बंसरी को रोहन का मुरझाया हुआ लंड दिखाई देना लगा, जिस पर अभी भी कंडोम चढ़ा हुआ था। उसका लंड अब थका-थका सा, नरम और चिपचिपा हो चुका था, लेकिन उसमें अभी भी पिछली उन्माद की गंध बाकी थी। बंसरी ने अपना हाथ लंड पर रखा और अपने हाथ से कंडोम को उतारने लगी। उसकी उँगलियाँ इतनी निपुण थीं कि कंडोम जैसे अपने आप खिसक गया। कंडोम उतारने के बाद उसने उस पर गठान लगे और पिछली चुदाई के कंडोमों के पास उसे भी रख दिया। तीनों कंडोम अब एक साथ पड़े थे, जैसे युद्ध के बाद के घाव के निशान।
बंसरी फिर से अलमारी में गई, कुछ करके वापस पलंग के पास आकर जमीन पर पड़ी अपनी पैंटी उठाकर उसने पहन ली। उसका शरीर अभी भी पूरी तरह तरोताज़ा था—पसीने की एक पतली परत उसकी गोर चमड़ी पर चमक रही थी, लेकिन उसकी साँसें बिलकुल सामान्य थीं। वह झुककर पैंटी उठाते वक्त उसकी गोल, भारी नितंब थोड़े से हिले, और कमरे की सफेद रोशनी में उसकी देह की हर रेखा और भी आकर्षक लग रही थी। उसकी जाँघों की चमक, उसकी कमर की घुमावदार रेखाएँ, सब कुछ जैसे कोई जीवंत मूर्ति थी। फिर उसने कुछ अन्य चीजें अलमारी से निकालकर पलंग के आस-पास रख दीं। हर चीज़ को वह इतने आत्मविश्वास से रख रही थी, जैसे यह कमरा उसकी अपनी रण भूमि हो, जैसे वह यहाँ की रानी हो और रोहन उसका प्रिय राजा।
फिर मेज से वही चॉकलेट वाली खाली प्लेट उठाई और उसमें अंगूर का एक बड़ा सा गुच्छा, दो सेब, दो चीकू आदि फल ले आई और उसमें एक चाकू भी रख लिया। प्लेट अब और भी आकर्षक लग रही थी—ताज़े फलों की महक कमरे की चंदन की खुशबू में घुल रही थी, अंगूरों की मीठी गंध, सेब की ताज़गी, चीकू की मिट्टी जैसी सुगंध सब मिलकर एक अनोखा सुगंधित माहौल बना रही थी। उसे पलंग के बगल वाली मेज पर रख दिया, जहाँ मार्बल की सतह चमक रही थी और लैंप की रोशनी फलों पर पड़कर उन्हें और भी रसदार दिखा रही थी।
रोहन अभी भी पलंग पर लेटा हुआ था और आँखें बंद किए हुए गहरी-गहरी साँसें ले रहा था, लेकिन अब उसकी साँसें पहले से कमज़ोर हो गई थीं। इससे साफ़ पता चल रहा था कि अब उसमें हल्की-हल्की जान आने लगी है। उसके माथे पर पसीने की बूँदें अभी भी चमक रही थीं, उस भव्य पलंग पर वह दृश्य जैसे कोई कलाकृति लग रहा था—एक थका हुआ योद्धा, अपनी प्रेमिका की गोद में।
रोहन की तुलना में बंसरी की हालत बिलकुल सामान्य थी, वो ज्यादा थकी हुई नहीं लग रही थी, ऐसा लग रहा था यह तो उसके लिए बहुत सामान्य बात थी। यह उसके अनुभव के कारण था। एक महीने पहले गोवा की ट्रिप को अगर छोड़ भी दिया जाए, तो जैसे हालात गोवा की ट्रिप में उसके साथ 24 घंटे में दो बार हो रहे थे, ऐसा अनुभव उसने बहुत बार किया था। गोवा की ट्रिप में तो प्रतिदिन वह पाँच मर्दों के साथ करती थी—दिन में दो मर्द और रात में तीन मर्द—उसके सारे होल को अच्छे से खोलते थे, उसकी चूत को इतना फैलाते थे कि उसे चलने में भी दर्द होता था, लेकिन वह मुस्कुराती रहती थी। उन अफ्रीकी महाद्वीप के मर्दों के विशालकाय लंड उसकी देह को बार-बार चीरते थे, उसकी चीखें रिजोर्ट के पूरे विला में गूँजती थीं, लेकिन वह हर बार और ज्यादा माँगती थी। लेकिन उसने इससे पहले भी कई बार ऐसे हालात झेले थे, बेशक उन सब के लंड गोवा ट्रिप की अफ्रीकी महाद्वीप के मर्दों से कुछ छोटे रहे होंगे, परंतु चुदाई तो उन्होंने भी उसकी बहुत अच्छे से की थी। जैसे अपनी दो अय्याश अमीर सहेलियों में से एक सहेली की बड़ी बहन की शादी के समय दूल्हे के दोस्तों ने बैचलर पार्टी रखी थी, उस बैचलर पार्टी में बंसरी की जम के चुदाई हुई थी। उस बैचलर पार्टी में दो मर्दों के लंड ही अच्छे थे, वरना सब सामान्य या उससे भी कमज़ोर लंड थे। परंतु उसे पार्टी में सब मर्दों ने दवाई खा रखी थी, तो उस रात उनकी खूब चुदाई हुई थी—वे उसे घंटों तक बारी-बारी से चोदते रहे थे, कभी दो-दो एक साथ, कभी उसके मुँह में, कभी चूत में, कभी गाँड में। उसकी मूंह से रस और वीर्य का मिश्रण बहता रहा था, लेकिन वह हँसती रही थी। अगर उस चुदाई से ही आज की चुदाई की तुलना कर ली जाए तो यह चुदाई तो कुछ भी नहीं है उसके सामने। इसी कारण से बंसरी बिलकुल सामान्य व्यवहार कर रही थी, जैसे यह उसके लिए सिर्फ़ एक और मधुर रात हो।
उसने रोहन को उठाया और बेड के सहारे बिठाया। अब तक 5 मिनट बीत चुके थे और रोहन की साँस धीमी हो गई थी, परंतु सब पता चल रहा था कि उसका शरीर बिलकुल थका हुआ है। बंसरी ने उसे किस किया—एक लंबा, गहरा, जीभ तक घुसाने वाला किस, जिसमें उसकी सारी ममता, सारा प्यार, सारी कामुकता घुली हुई थी—और उससे पूछा,
“मेरी जान, मेरा तरीका तुम्हें पसंद आया? क्या मैंने तुम्हें वह सुख दिया जो तुमने कभी सपने में भी नहीं सोचा था? क्या मेरी चूत ने तुम्हारे लंड को वह आग दी जो तुम चाहते थे? बोलो ना, मेरे राजा, तुम्हारी रानी को तुम्हारी तारीफ़ सुननी है।”
रोहन ने बंसरी को किस किया—उसके होंठों को चूसते हुए, उसकी जीभ को अपनी जीभ से लपेटते हुए—और जब बंसरी का उसने सवाल सुना तो रोते गले से बोला,
“शायद मैंने अपने जीवन में कुछ अच्छे काम किए होंगे जो भगवान ने मेरी शादी तुमसे कर दी। तुम... तुम तो स्वर्ग से उतरी देवी हो, बंसरी। तुमने मुझे वह सुख दिया जो मैंने कभी किसी किताब में, किसी फिल्म में, किसी कल्पना में भी नहीं देखा था।”
बंसरी ने उसे फिर से किस किया—इस बार और गहरा, उसके गालों पर, उसकी गर्दन पर, उसके कानों में फुसफुसाते हुए—और बोली,
“रो क्यों रहे हो? मैं तो तुम्हारी ही हूँ। तुम्हारी खुशी के लिए तो ही मैंने यह सब किया। तुम्हारी आँखों में जो आँसू हैं, वे मेरे लिए सबसे बड़ा इनाम हैं। मैं तुम्हें और सुख दूँगी, मेरे पति, जितना तुम चाहोगे, उतना।”
रोहन अपने दोनों हाथों में बंसरी के दोनों हाथ लेते हुए उसे कहता है,
“मैं सच बोल रहा हूँ। पिछले 3:30 घंटे में जो तुमने मुझे सुख दिया है, दुनिया के 90% मर्द इस सुख से वंचित रह जाते हैं। 10% मर्दों को ही यह सुख प्राप्त होता है। मैं अपने आप को भाग्यशाली मानता हूँ कि मेरा नंबर उन 10% मर्दों में है, वरना मैं तो अपनी पूरी जिंदगी अपने आप को उन 90% मर्दों में से एक ही माना था। तुमने मुझे ऐसा महसूस कराया कि मैं राजा हूँ, तुम मेरी रानी हो, और यह रात हमारी अनंत प्रेम की कहानी है।”
रोहन आगे बोलता है,
“इन कुछ घंटों में मुझे यह भी एहसास हो गया है कि शादी से पहले तुम्हारी जिंदगी में कई मर्द आए हैं जिन्होंने तुम्हें भरपूर सुख दिया है। मैं भी तुम्हें भरपूर सुख देने की कोशिश करूँगा, चाहे इसके लिए मुझे कुछ भी करना पड़े। मैं सीखूँगा, मैं अभ्यास करूँगा, मैं तुम्हारी हर इच्छा पूरी करूँगा।”
बंसरी उसके मुँह पर हाथ रखते हुए कहती है,
“अब चुप हो जाओ और शांति से बैठ जाओ। तुम्हारी ये बातें सुनकर मेरा दिल भर आता है, लेकिन अभी तुम आराम करो। मैं तुम्हारी सेवा करूँगी।”
रोहन ने एक आज्ञाकारी पति की तरह उसकी बात मान ली, उसकी आँखों में समर्पण था, प्रेम था, और थोड़ी-सी शरम भी।
फिर बंसरी पीछे मुड़ी और पलंग के बगल की मेज पर रखी वही फलों वाली प्लेट उठा ली। उसकी देह जब मुड़ी तो कमरे के मिरर में उसकी पीठ की सुंदर वक्र रेखाएँ साफ़ दिखाई दीं—जैसे कोई मूर्तिकार ने परफ़ेक्ट कर्व्स तराशे हों, जैसे कोई कलाकार ने रात भर जागकर यह सुंदरता गढ़ी हो।
रोहन बोला,
“अब खाने की क्या ज़रूरत है? चलो सो जाते हैं। वैसे भी घड़ी में 12:45 हो गए हैं। मैं तो बस तुम्हारी बहों में सो जाना चाहता हूँ।”
बंसरी रोहन को आँख मारते हुए कहती है,
“मुझे अभी अपने पति को वह सुख देना है, जिसके लिए हर पति अपनी पत्नी की ख्वाहिशें पूरी करता है, बॉयफ्रेंड अपनी गर्लफ्रेंड को भरपूर शॉपिंग कराता है, बॉस अपने जूनियर्स का प्रमोशन करते हैं, लड़के सारी डिमांड पूरी करते हैं। अब मैं तुम्हें असली चाहत का सुख दूँगी। तुम्हें मेरे हाथों से खिलाए गए फल का स्वाद चखाऊँगी, जिससे तुम्हारी थकान दूर हो जाएगी और तुम फिर से मेरे लिए तैयार हो जाओगे।”
इसके बाद रोहन कुछ नहीं कहता। अगर उसकी प्यारी पत्नी बंसरी ऐसा कह रही है तो वह सच ही कह रही होगी। उसे इस बात की खुशी है कि अब तक उसने जो हासिल किया है, उससे भी ज़्यादा कुछ और हासिल कर सकता है। बंसरी द्वारा किया गया हर तरीका जो उसने आजमाया था, उससे मिले सुख की तो वह कल्पना भी नहीं कर सकता था—बिना बंसरी के अपने जीवन में।
इस सब के बाद रोहन अपने हाथों से प्लेट में से अंगूरों को खाने लगता है। बंसरी सेब और अन्य फलों को काटने लगती है और अपने हाथों से भी रोहन को खिलाने लगती है। हर काटे हुए टुकड़े को वह पहले अपने होंठों से छूकर, फिर रोहन के मुँह में रखती—जैसे हर टुकड़ा प्रेम का एक-एक कौर हो, जैसे हर टुकड़े में उसकी कामुकता और ममता घुली हुई हो। अंगूरों का रस उनके होंठों पर चमक रहा था, सेब की मीठी खुशबू कमरे में फैल रही थी, और चीकू के रसदार टुकड़े उनके हाथों को चिपचिपा रहे थे। दोनों बातें करने लगते हैं, उनके शब्दों में प्यार था, शरारत थी, और गहरी समझ थी।
बंसरी रोहन से कहती है,
“तुम मुझसे तो इतनी सारी बातें पूछ रहे थे, पर अपने बारे में कुछ नहीं बता रहे थे। अब बताओ ना, मेरे पति, तुम्हारी वो गुप्त इच्छाएँ क्या हैं जिन्हें तुमने कभी किसी से नहीं कहा? मुझे सब बताओ, मैं तुम्हारी हर इच्छा पूरी करूँगी।”
रोहन बंसरी के सर पर हाथ रखते हुए कहता है,
“मेरी जान, तुम जो चाहे मुझे पूछ लो। मैं तुम्हें सच-सच जवाब दूँगा। तुम मेरी पत्नी हो, मेरी आत्मा हो, मेरे सामने कुछ भी छिपाना नहीं चाहता।”
“दुनिया में तुम किसी लड़की के साथ सेक्स करना चाहते हो जो तुम्हें सबसे ज़्यादा पसंद है?” बंसरी ने पूछा, उसकी आँखों में शरारत और प्यार दोनों थे, उसकी उँगलियाँ रोहन के बालों में घूम रही थीं।
“जिसके साथ मैं करना चाहता हूँ, आज की रात मैं उसके साथ कर चुका हूँ,” रोहन ने मुस्कुराते हुए कहा, उसकी थकी हुई आँखों में भी चमक आ गई। “तुम्हारे अलावा और कोई नहीं, बंसरी।”
“तो आपको मिसेस बंसरी रोहन कसाना की चूत मारने की ख्वाहिश थी,” बंसरी ने उसे छेड़ते हुए कहा, उसकी हँसी कमरे की भव्यता को और भी जीवंत कर रही थी। “लेकिन अब तो तुम उसकी चूत में अपना लंड उतार चुके हो, लेकिन उससे मिलने से पहले तुम किसकी चूत में अपना लंड डालना चाहते थे? बताओ ना, मेरे राजा, मुझे सब पता चलना चाहिए।”
रोहन फल चबाते हुए, बंसरी के होंठों पर किस करते हुए बताता है,
“तुम्हें मिलने से पहले मुझे मेरी छोटी बहन की जो ननद है, वह पसंद आई थी। जब मेरी बहन की शादी हुई थी तब बहन की ननद 16 साल की थी। आज मेरी बहन की शादी को 4 साल हो चुके हैं, आज उसकी ननद 20 साल की हो गई है। बहुत पहले से कहीं ज़्यादा कयामत हो गई है। परंतु बंसरी मेरी जान, तुम्हारे सामने तो मेरी बहन की ननद कुछ भी नहीं है। अगर तुमसे मेरी शादी नहीं हुई होती तो मैं उससे ही शादी करना चाहता था। परंतु हम दोनों की उम्र में 13 साल का अंतर है। मैं अगर अपनी चाहत किसी को बताता तो शायद कोई भी उसे पूरा नहीं करता, यहाँ तक कि मेरा परिवार भी मेरा साथ नहीं देता। इसी लिए मैंने अपनी चाहत को अपने मन में दबा लिया। लेकिन अब तुम हो, तो मैं सब कुछ तुमसे कह सकता हूँ।”
बंसरी मन ही मन में प्रतिज्ञा लेती है,
“अगर मेरा पति अपनी बहन की ननद को चोदना चाहता है तो मैं कुछ भी करके उससे चुदवाऊँगी। चाहे मुझे कितनी भी मेहनत करनी पड़े, चाहे कितने भी रास्ते अपनाने पड़ें, मैं अपने पति की इस ख्वाहिश को पूरी करके रहूँगी। क्योंकि उसकी ये खुशी ही मेरी सबसे बड़ी खुशी है। मैं उसे वो देखूँगी जब वह अपनी बहन की ननद को चोद रहा होगा, और मैं खुद उसकी मदद करूँगी—उसे तैयार करूँगी, उसे उत्तेजित करूँगी, और फिर उसके बाद खुद उसकी चूत चाटूँगी। यह मेरा वादा है, मेरा प्रेम का वादा।”
कमरे की सफेद रोशनी में, फलों की मिठास और उनके शब्दों की गहराई के बीच, वह रात और भी अनमोल होती जा रही थी। उनके बीच का प्रेम अब सिर्फ़ शारीरिक नहीं, बल्कि आत्मिक भी हो चुका था—एक अनंत मिठास, जो कभी खत्म नहीं होने वाली थी। बंसरी ने रोहन को और कसकर गले लगाया, उसके कानों में फुसफुसाया, “मैं तुम्हारी हूँ, हमेशा।” और रोहन की आँखें फिर से नम हो गईं, लेकिन इस बार खुशी के आँसू थे। रात अभी बहुत लंबी थी, और उनका प्रेम अभी बहुत कुछ बाकी था।
उस भव्य शयनकक्ष में, जहाँ हर कोना चंदन की महक और मोमबत्तियों की हल्की-हल्की खुशबू से भरा हुआ था, रोहन का शरीर पूरा खाली हो गया था। जैसे कोई तूफ़ान गुज़रकर चला गया हो और समुद्र की सारी लहरें शांत हो गई हों, वैसे ही उसकी सारी ऊर्जा, सारी ताकत, सारी जवानी उस रात की उन्मादपूर्ण चुदाई में समा चुकी थी। उसका हर मांसपेशी थकान से काँप रहा था, उसकी छाती भारी-भारी हो रही थी और उसकी साँसें इतनी धीमी थीं कि लगता था जैसे कोई पुराना घाव धीरे-धीरे भर रहा हो। बंसरी ने उसे अपनी कोमल, गर्म बाहों में थामे हुए रखा। उसकी बाहें न सिर्फ़ प्यार से भरी थीं, बल्कि अनुभव की गहराई से भी मजबूत थीं—जैसे कोई प्राचीन देवी अपने भक्त को सहारा दे रही हो, जैसे कोई अनुभवी रानी अपने राजा को उसके युद्ध के बाद सँभाल रही हो। एयर-कंडीशनर की ठंडी हवा धीरे-धीरे उनके पसीने से तर शरीरों को छू रही थी, उसकी ठंडक उनकी गर्म त्वचा पर सिहरन पैदा कर रही थी, और दूर कहीं घड़ी की सुइयाँ 12:30 बजा रही थीं, उनकी टिक-टिक की आवाज़ कमरे की भव्यता में गूँज रही थी।
बंसरी ने उसे अपने आप से चिपकाए हुए पलंग के पास ले आई, और उसे लिटा दिया। उसका स्पर्श इतना कोमल था कि रोहन को लगा जैसे कोई रेशमी चादर उसके थके हुए शरीर को ढक रही हो, जैसे कोई माँ अपने बच्चे को सुला रही हो, परंतु यह माँ का स्पर्श नहीं, बल्कि प्रेमिका का, पत्नी का, कामुक देवी का स्पर्श था। रोहन पूरी तरह से थक गया था, इसीलिए जैसे ही बंसरी उसे पलंग के पास लाई, वह तुरंत पेट के बल लेट गया और अपनी आँखें बंद कर ली। उसके शरीर में बहुत कमजोरी महसूस हो रही थी, उसे ऐसा लग रहा था कि उसमें अभी जान बची ही नहीं है। उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी, लेकिन बहुत धीरे-धीरे, जैसे कोई पुराना घाव भर रहा हो, जैसे कोई तूफ़ान के बाद का समुद्र धीरे-धीरे शांत हो रहा हो।
बंसरी नीचे झुकी और रोहन की दोनों टांगों को अपने हाथों से फैला दिया, जिससे बंसरी को रोहन का मुरझाया हुआ लंड दिखाई देना लगा, जिस पर अभी भी कंडोम चढ़ा हुआ था। उसका लंड अब थका-थका सा, नरम और चिपचिपा हो चुका था, लेकिन उसमें अभी भी पिछली उन्माद की गंध बाकी थी। बंसरी ने अपना हाथ लंड पर रखा और अपने हाथ से कंडोम को उतारने लगी। उसकी उँगलियाँ इतनी निपुण थीं कि कंडोम जैसे अपने आप खिसक गया। कंडोम उतारने के बाद उसने उस पर गठान लगे और पिछली चुदाई के कंडोमों के पास उसे भी रख दिया। तीनों कंडोम अब एक साथ पड़े थे, जैसे युद्ध के बाद के घाव के निशान।
बंसरी फिर से अलमारी में गई, कुछ करके वापस पलंग के पास आकर जमीन पर पड़ी अपनी पैंटी उठाकर उसने पहन ली। उसका शरीर अभी भी पूरी तरह तरोताज़ा था—पसीने की एक पतली परत उसकी गोर चमड़ी पर चमक रही थी, लेकिन उसकी साँसें बिलकुल सामान्य थीं। वह झुककर पैंटी उठाते वक्त उसकी गोल, भारी नितंब थोड़े से हिले, और कमरे की सफेद रोशनी में उसकी देह की हर रेखा और भी आकर्षक लग रही थी। उसकी जाँघों की चमक, उसकी कमर की घुमावदार रेखाएँ, सब कुछ जैसे कोई जीवंत मूर्ति थी। फिर उसने कुछ अन्य चीजें अलमारी से निकालकर पलंग के आस-पास रख दीं। हर चीज़ को वह इतने आत्मविश्वास से रख रही थी, जैसे यह कमरा उसकी अपनी रण भूमि हो, जैसे वह यहाँ की रानी हो और रोहन उसका प्रिय राजा।
फिर मेज से वही चॉकलेट वाली खाली प्लेट उठाई और उसमें अंगूर का एक बड़ा सा गुच्छा, दो सेब, दो चीकू आदि फल ले आई और उसमें एक चाकू भी रख लिया। प्लेट अब और भी आकर्षक लग रही थी—ताज़े फलों की महक कमरे की चंदन की खुशबू में घुल रही थी, अंगूरों की मीठी गंध, सेब की ताज़गी, चीकू की मिट्टी जैसी सुगंध सब मिलकर एक अनोखा सुगंधित माहौल बना रही थी। उसे पलंग के बगल वाली मेज पर रख दिया, जहाँ मार्बल की सतह चमक रही थी और लैंप की रोशनी फलों पर पड़कर उन्हें और भी रसदार दिखा रही थी।
रोहन अभी भी पलंग पर लेटा हुआ था और आँखें बंद किए हुए गहरी-गहरी साँसें ले रहा था, लेकिन अब उसकी साँसें पहले से कमज़ोर हो गई थीं। इससे साफ़ पता चल रहा था कि अब उसमें हल्की-हल्की जान आने लगी है। उसके माथे पर पसीने की बूँदें अभी भी चमक रही थीं, उस भव्य पलंग पर वह दृश्य जैसे कोई कलाकृति लग रहा था—एक थका हुआ योद्धा, अपनी प्रेमिका की गोद में।
रोहन की तुलना में बंसरी की हालत बिलकुल सामान्य थी, वो ज्यादा थकी हुई नहीं लग रही थी, ऐसा लग रहा था यह तो उसके लिए बहुत सामान्य बात थी। यह उसके अनुभव के कारण था। एक महीने पहले गोवा की ट्रिप को अगर छोड़ भी दिया जाए, तो जैसे हालात गोवा की ट्रिप में उसके साथ 24 घंटे में दो बार हो रहे थे, ऐसा अनुभव उसने बहुत बार किया था। गोवा की ट्रिप में तो प्रतिदिन वह पाँच मर्दों के साथ करती थी—दिन में दो मर्द और रात में तीन मर्द—उसके सारे होल को अच्छे से खोलते थे, उसकी चूत को इतना फैलाते थे कि उसे चलने में भी दर्द होता था, लेकिन वह मुस्कुराती रहती थी। उन अफ्रीकी महाद्वीप के मर्दों के विशालकाय लंड उसकी देह को बार-बार चीरते थे, उसकी चीखें रिजोर्ट के पूरे विला में गूँजती थीं, लेकिन वह हर बार और ज्यादा माँगती थी। लेकिन उसने इससे पहले भी कई बार ऐसे हालात झेले थे, बेशक उन सब के लंड गोवा ट्रिप की अफ्रीकी महाद्वीप के मर्दों से कुछ छोटे रहे होंगे, परंतु चुदाई तो उन्होंने भी उसकी बहुत अच्छे से की थी। जैसे अपनी दो अय्याश अमीर सहेलियों में से एक सहेली की बड़ी बहन की शादी के समय दूल्हे के दोस्तों ने बैचलर पार्टी रखी थी, उस बैचलर पार्टी में बंसरी की जम के चुदाई हुई थी। उस बैचलर पार्टी में दो मर्दों के लंड ही अच्छे थे, वरना सब सामान्य या उससे भी कमज़ोर लंड थे। परंतु उसे पार्टी में सब मर्दों ने दवाई खा रखी थी, तो उस रात उनकी खूब चुदाई हुई थी—वे उसे घंटों तक बारी-बारी से चोदते रहे थे, कभी दो-दो एक साथ, कभी उसके मुँह में, कभी चूत में, कभी गाँड में। उसकी मूंह से रस और वीर्य का मिश्रण बहता रहा था, लेकिन वह हँसती रही थी। अगर उस चुदाई से ही आज की चुदाई की तुलना कर ली जाए तो यह चुदाई तो कुछ भी नहीं है उसके सामने। इसी कारण से बंसरी बिलकुल सामान्य व्यवहार कर रही थी, जैसे यह उसके लिए सिर्फ़ एक और मधुर रात हो।
उसने रोहन को उठाया और बेड के सहारे बिठाया। अब तक 5 मिनट बीत चुके थे और रोहन की साँस धीमी हो गई थी, परंतु सब पता चल रहा था कि उसका शरीर बिलकुल थका हुआ है। बंसरी ने उसे किस किया—एक लंबा, गहरा, जीभ तक घुसाने वाला किस, जिसमें उसकी सारी ममता, सारा प्यार, सारी कामुकता घुली हुई थी—और उससे पूछा,
“मेरी जान, मेरा तरीका तुम्हें पसंद आया? क्या मैंने तुम्हें वह सुख दिया जो तुमने कभी सपने में भी नहीं सोचा था? क्या मेरी चूत ने तुम्हारे लंड को वह आग दी जो तुम चाहते थे? बोलो ना, मेरे राजा, तुम्हारी रानी को तुम्हारी तारीफ़ सुननी है।”
रोहन ने बंसरी को किस किया—उसके होंठों को चूसते हुए, उसकी जीभ को अपनी जीभ से लपेटते हुए—और जब बंसरी का उसने सवाल सुना तो रोते गले से बोला,
“शायद मैंने अपने जीवन में कुछ अच्छे काम किए होंगे जो भगवान ने मेरी शादी तुमसे कर दी। तुम... तुम तो स्वर्ग से उतरी देवी हो, बंसरी। तुमने मुझे वह सुख दिया जो मैंने कभी किसी किताब में, किसी फिल्म में, किसी कल्पना में भी नहीं देखा था।”
बंसरी ने उसे फिर से किस किया—इस बार और गहरा, उसके गालों पर, उसकी गर्दन पर, उसके कानों में फुसफुसाते हुए—और बोली,
“रो क्यों रहे हो? मैं तो तुम्हारी ही हूँ। तुम्हारी खुशी के लिए तो ही मैंने यह सब किया। तुम्हारी आँखों में जो आँसू हैं, वे मेरे लिए सबसे बड़ा इनाम हैं। मैं तुम्हें और सुख दूँगी, मेरे पति, जितना तुम चाहोगे, उतना।”
रोहन अपने दोनों हाथों में बंसरी के दोनों हाथ लेते हुए उसे कहता है,
“मैं सच बोल रहा हूँ। पिछले 3:30 घंटे में जो तुमने मुझे सुख दिया है, दुनिया के 90% मर्द इस सुख से वंचित रह जाते हैं। 10% मर्दों को ही यह सुख प्राप्त होता है। मैं अपने आप को भाग्यशाली मानता हूँ कि मेरा नंबर उन 10% मर्दों में है, वरना मैं तो अपनी पूरी जिंदगी अपने आप को उन 90% मर्दों में से एक ही माना था। तुमने मुझे ऐसा महसूस कराया कि मैं राजा हूँ, तुम मेरी रानी हो, और यह रात हमारी अनंत प्रेम की कहानी है।”
रोहन आगे बोलता है,
“इन कुछ घंटों में मुझे यह भी एहसास हो गया है कि शादी से पहले तुम्हारी जिंदगी में कई मर्द आए हैं जिन्होंने तुम्हें भरपूर सुख दिया है। मैं भी तुम्हें भरपूर सुख देने की कोशिश करूँगा, चाहे इसके लिए मुझे कुछ भी करना पड़े। मैं सीखूँगा, मैं अभ्यास करूँगा, मैं तुम्हारी हर इच्छा पूरी करूँगा।”
बंसरी उसके मुँह पर हाथ रखते हुए कहती है,
“अब चुप हो जाओ और शांति से बैठ जाओ। तुम्हारी ये बातें सुनकर मेरा दिल भर आता है, लेकिन अभी तुम आराम करो। मैं तुम्हारी सेवा करूँगी।”
रोहन ने एक आज्ञाकारी पति की तरह उसकी बात मान ली, उसकी आँखों में समर्पण था, प्रेम था, और थोड़ी-सी शरम भी।
फिर बंसरी पीछे मुड़ी और पलंग के बगल की मेज पर रखी वही फलों वाली प्लेट उठा ली। उसकी देह जब मुड़ी तो कमरे के मिरर में उसकी पीठ की सुंदर वक्र रेखाएँ साफ़ दिखाई दीं—जैसे कोई मूर्तिकार ने परफ़ेक्ट कर्व्स तराशे हों, जैसे कोई कलाकार ने रात भर जागकर यह सुंदरता गढ़ी हो।
रोहन बोला,
“अब खाने की क्या ज़रूरत है? चलो सो जाते हैं। वैसे भी घड़ी में 12:45 हो गए हैं। मैं तो बस तुम्हारी बहों में सो जाना चाहता हूँ।”
बंसरी रोहन को आँख मारते हुए कहती है,
“मुझे अभी अपने पति को वह सुख देना है, जिसके लिए हर पति अपनी पत्नी की ख्वाहिशें पूरी करता है, बॉयफ्रेंड अपनी गर्लफ्रेंड को भरपूर शॉपिंग कराता है, बॉस अपने जूनियर्स का प्रमोशन करते हैं, लड़के सारी डिमांड पूरी करते हैं। अब मैं तुम्हें असली चाहत का सुख दूँगी। तुम्हें मेरे हाथों से खिलाए गए फल का स्वाद चखाऊँगी, जिससे तुम्हारी थकान दूर हो जाएगी और तुम फिर से मेरे लिए तैयार हो जाओगे।”
इसके बाद रोहन कुछ नहीं कहता। अगर उसकी प्यारी पत्नी बंसरी ऐसा कह रही है तो वह सच ही कह रही होगी। उसे इस बात की खुशी है कि अब तक उसने जो हासिल किया है, उससे भी ज़्यादा कुछ और हासिल कर सकता है। बंसरी द्वारा किया गया हर तरीका जो उसने आजमाया था, उससे मिले सुख की तो वह कल्पना भी नहीं कर सकता था—बिना बंसरी के अपने जीवन में।
इस सब के बाद रोहन अपने हाथों से प्लेट में से अंगूरों को खाने लगता है। बंसरी सेब और अन्य फलों को काटने लगती है और अपने हाथों से भी रोहन को खिलाने लगती है। हर काटे हुए टुकड़े को वह पहले अपने होंठों से छूकर, फिर रोहन के मुँह में रखती—जैसे हर टुकड़ा प्रेम का एक-एक कौर हो, जैसे हर टुकड़े में उसकी कामुकता और ममता घुली हुई हो। अंगूरों का रस उनके होंठों पर चमक रहा था, सेब की मीठी खुशबू कमरे में फैल रही थी, और चीकू के रसदार टुकड़े उनके हाथों को चिपचिपा रहे थे। दोनों बातें करने लगते हैं, उनके शब्दों में प्यार था, शरारत थी, और गहरी समझ थी।
बंसरी रोहन से कहती है,
“तुम मुझसे तो इतनी सारी बातें पूछ रहे थे, पर अपने बारे में कुछ नहीं बता रहे थे। अब बताओ ना, मेरे पति, तुम्हारी वो गुप्त इच्छाएँ क्या हैं जिन्हें तुमने कभी किसी से नहीं कहा? मुझे सब बताओ, मैं तुम्हारी हर इच्छा पूरी करूँगी।”
रोहन बंसरी के सर पर हाथ रखते हुए कहता है,
“मेरी जान, तुम जो चाहे मुझे पूछ लो। मैं तुम्हें सच-सच जवाब दूँगा। तुम मेरी पत्नी हो, मेरी आत्मा हो, मेरे सामने कुछ भी छिपाना नहीं चाहता।”
“दुनिया में तुम किसी लड़की के साथ सेक्स करना चाहते हो जो तुम्हें सबसे ज़्यादा पसंद है?” बंसरी ने पूछा, उसकी आँखों में शरारत और प्यार दोनों थे, उसकी उँगलियाँ रोहन के बालों में घूम रही थीं।
“जिसके साथ मैं करना चाहता हूँ, आज की रात मैं उसके साथ कर चुका हूँ,” रोहन ने मुस्कुराते हुए कहा, उसकी थकी हुई आँखों में भी चमक आ गई। “तुम्हारे अलावा और कोई नहीं, बंसरी।”
“तो आपको मिसेस बंसरी रोहन कसाना की चूत मारने की ख्वाहिश थी,” बंसरी ने उसे छेड़ते हुए कहा, उसकी हँसी कमरे की भव्यता को और भी जीवंत कर रही थी। “लेकिन अब तो तुम उसकी चूत में अपना लंड उतार चुके हो, लेकिन उससे मिलने से पहले तुम किसकी चूत में अपना लंड डालना चाहते थे? बताओ ना, मेरे राजा, मुझे सब पता चलना चाहिए।”
रोहन फल चबाते हुए, बंसरी के होंठों पर किस करते हुए बताता है,
“तुम्हें मिलने से पहले मुझे मेरी छोटी बहन की जो ननद है, वह पसंद आई थी। जब मेरी बहन की शादी हुई थी तब बहन की ननद 16 साल की थी। आज मेरी बहन की शादी को 4 साल हो चुके हैं, आज उसकी ननद 20 साल की हो गई है। बहुत पहले से कहीं ज़्यादा कयामत हो गई है। परंतु बंसरी मेरी जान, तुम्हारे सामने तो मेरी बहन की ननद कुछ भी नहीं है। अगर तुमसे मेरी शादी नहीं हुई होती तो मैं उससे ही शादी करना चाहता था। परंतु हम दोनों की उम्र में 13 साल का अंतर है। मैं अगर अपनी चाहत किसी को बताता तो शायद कोई भी उसे पूरा नहीं करता, यहाँ तक कि मेरा परिवार भी मेरा साथ नहीं देता। इसी लिए मैंने अपनी चाहत को अपने मन में दबा लिया। लेकिन अब तुम हो, तो मैं सब कुछ तुमसे कह सकता हूँ।”
बंसरी मन ही मन में प्रतिज्ञा लेती है,
“अगर मेरा पति अपनी बहन की ननद को चोदना चाहता है तो मैं कुछ भी करके उससे चुदवाऊँगी। चाहे मुझे कितनी भी मेहनत करनी पड़े, चाहे कितने भी रास्ते अपनाने पड़ें, मैं अपने पति की इस ख्वाहिश को पूरी करके रहूँगी। क्योंकि उसकी ये खुशी ही मेरी सबसे बड़ी खुशी है। मैं उसे वो देखूँगी जब वह अपनी बहन की ननद को चोद रहा होगा, और मैं खुद उसकी मदद करूँगी—उसे तैयार करूँगी, उसे उत्तेजित करूँगी, और फिर उसके बाद खुद उसकी चूत चाटूँगी। यह मेरा वादा है, मेरा प्रेम का वादा।”
कमरे की सफेद रोशनी में, फलों की मिठास और उनके शब्दों की गहराई के बीच, वह रात और भी अनमोल होती जा रही थी। उनके बीच का प्रेम अब सिर्फ़ शारीरिक नहीं, बल्कि आत्मिक भी हो चुका था—एक अनंत मिठास, जो कभी खत्म नहीं होने वाली थी। बंसरी ने रोहन को और कसकर गले लगाया, उसके कानों में फुसफुसाया, “मैं तुम्हारी हूँ, हमेशा।” और रोहन की आँखें फिर से नम हो गईं, लेकिन इस बार खुशी के आँसू थे। रात अभी बहुत लंबी थी, और उनका प्रेम अभी बहुत कुछ बाकी था।