बदन की आग
Posted: 12 Feb 2026 15:42
अध्याय 1: बदन की आग 1
अमन ने जैसे ही घर के मुख्य दरवाजे की कुंडी लगाई, उसके कानों में एक गहरा सन्नाटा गूंज उठा। घर, जो आम तौर पर परिवार की हलचल से भरा रहता था – रोहन की हंसी, टीवी की आवाजें, रसोई से आती खटपट – आज पूरी तरह से खाली और नीरस लग रहा था। सब बाहर मूवी देखने गए थे, और यह फैसला अचानक ही हुआ था, शायद किसी पारिवारिक उत्साह में। घर की दीवारें, जो सफेद प्लास्टर से ढकी हुई थीं और जगह-जगह परिवार की तस्वीरों से सजी हुईं, अब बस छायाओं में डूबी हुई लग रही थीं। हॉल की फर्श पर पड़े कालीन की मुलायमियत अमन के जूतों के नीचे दब गई, लेकिन कोई आवाज नहीं हुई – सिर्फ उसकी सांसों की हल्की गूंज। बाहर की सड़क से आने वाली गाड़ियों की दूर की आवाजें भी दीवारों से टकराकर मर जातीं, जैसे घर ने खुद को दुनिया से अलग कर लिया हो। हवा में एक हल्की सी ठंडक थी, क्योंकि शाम ढल चुकी थी और एयर कंडीशनर बंद था, लेकिन अमन के शरीर में एक अलग ही गर्मी फैल रही थी – उत्सुकता और घबराहट की मिली-जुली।
अंजलि ने उसे पहले ही बता दिया था: "गेस्ट रूम में इंतजार करूंगी। दरवाजा बंद करके पलंग पर बैठ जाना।" उसकी आवाज फोन पर कितनी नरम और रहस्यमयी लगी थी, जैसे कोई पुरानी किताब की पन्नों से निकली राज। अमन ने जल्दी से हॉल पार किया, उसके कदमों की आवाज फर्श पर हल्की गूंज पैदा कर रही थी। गेस्ट रूम घर के कोने में था, जहां आम तौर पर मेहमानों के लिए सजाया जाता था – सफेद चादरें, लकड़ी का मजबूत पलंग, और एक छोटा सा ड्रेसिंग टेबल। लेकिन आज यह कमरा अमन के लिए एक अलग दुनिया का द्वार लग रहा था।
दरवाजा खोलते ही अमन की आंखों पर अंधेरे का एक काला पर्दा गिर गया। कमरे में कोई रोशनी नहीं थी – न खिड़की से आती चांदनी, न कोई लैंप। सिर्फ दरवाजे से आती हॉल की हल्की पीली रोशनी कमरे में एक पतली सी रेखा बनाकर फैल रही थी, जो फर्श पर लकड़ी के पैटर्न को हल्का सा उजागर कर रही थी। हवा में एक हल्की सी सुगंध थी – अंजलि की परफ्यूम की, जो गुलाब और चंदन की मिश्रित लग रही थी, लेकिन इतनी हल्की कि अमन को लगा जैसे वह सपना देख रहा हो। बेड पर कोई नहीं था; सिर्फ चादर की सिलवटें, जो दिन की सफाई के बाद बनी हुई थीं। अमन को लगा कि अंजलि शायद बाथरूम में है – कमरे के कोने में लगा छोटा सा बाथरूम, जहां टाइल्स ठंडी और सफेद थीं, और शॉवर से पानी की बूंदें अभी भी टपक रही होंगी। वह जानता था कि अंजलि ऐसी है – जो अपने वादे पर खरी उतरती है। अगर वह उसके कहे अनुसार नहीं करेगा, तो शायद वह सामने नहीं आएगी। यह विचार अमन के मन में एक रोमांच पैदा कर रहा था, जैसे कोई खेल जिसमें नियम छिपे हुए हैं।
अमन ने जल्दी से कमरे में कदम रखा और दरवाजा बंद कर लिया। क्लिक की आवाज के साथ ही कमरा पूरी तरह से अंधेरे में डूब गया। अब कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था – न पलंग की आउटलाइन, न दीवारें, न छत। सिर्फ अमन की सांसें, जो तेज हो रही थीं, और उसके दिल की धड़कन, जो कानों में गूंज रही थी। कमरे की हवा स्थिर थी, लेकिन अमन को लगा जैसे कोई अदृश्य स्पर्श उसे छू रहा हो – उत्सुकता का स्पर्श। उसे पता था कि पलंग कहां है; वह पहले कई बार इस कमरे में आ चुका था, लेकिन कभी ऐसे माहौल में नहीं। वह अंधेरे में टटोलते हुए चला, उसके हाथ हवा में लहराए, और आखिरकार पलंग का किनारा मिला। चादर की मुलायम साटन जैसी बनावट उसके हाथों को छू गई, और वह बैठ गया। पलंग हल्का सा डूबा, जैसे अमन के वजन से सहमत हो। अमन सोच रहा था कि अब अंजलि बाथरूम से बाहर आएगी – उसकी कल्पना में वह सफेद तौलिए में लिपटी हुई, बाल गीले, आंखें चमकती हुई। लेकिन अभी सन्नाटा था, सिर्फ उसकी अपनी सांसें।
अचानक, कमरे में एक हल्की सी क्लिक की आवाज हुई, और नाइट बल्ब जल उठा। पूरे कमरे में एक गहरा नीला रंग फैल गया – जैसे कोई समुद्र की गहराई में डूबा हो। यह रोशनी इतनी मद्धम और रहस्यमयी थी कि सब कुछ छायाओं में डूबा लग रहा था; दीवारें नीली हो गईं, पलंग की चादरें नीली, और हवा में भी एक नीली धुंध सी फैल गई। अमन की आंखें इस रोशनी में समायोजित होने लगीं, और उसकी नजर लाइट के बोर्ड की तरफ गई – कमरे के कोने में लगा स्विच बोर्ड, जहां से रोशनी नियंत्रित होती थी। वहां अंजलि खड़ी थी।
कमरे की यह नीली रोशनी इतनी गहरी थी कि अंजलि का शरीर एक काली परछाई जैसा लग रहा था – उसकी आकृति स्पष्ट, लेकिन विवरण छिपे हुए। अमन को उसका चेहरा बिल्कुल नहीं दिख रहा था; सिर्फ एक काला सिल्हूट, जहां आंखें, नाक, होंठ सब विलीन हो गए थे। यहां तक कि उसका गोरा बदन, जो अमन ने पहले कई बार कल्पना में देखा था, अब काला लग रहा था – जैसे कोई रात की देवी। लेकिन अमन का ध्यान इस पर नहीं था। उसका ध्यान तो अंजलि के पूरे बदन पर था। दरअसल, कमरा नीली रोशनी से नहाया हुआ था, और अंजलि बोर्ड के पास खड़ी थी, लेकिन उसने अपने शरीर पर केवल ब्रा और पैंटी पहन रखी थी। यह दृश्य अमन को स्तब्ध कर रहा था। ब्रा और पैंटी रेडियम के धागों से बनी हुई थीं – वे धागे जो अंधेरे में चमकते हैं, और नीली रोशनी पड़ने पर वे और ज्यादा चमक उठते हैं। इस रोशनी में वे चमक रही थीं, जैसे कोई आकाशगंगा अंजलि के शरीर के चारों ओर फैली हो। अंजलि किसी स्वर्ग से उतरी अप्सरा लग रही थी – उसकी आकृति इतनी मोहक कि अमन की सांसें रुक सी गईं।
अमन ने आज तक अंजलि को सिर्फ सलवार-कुर्ती या साड़ी में देखा था – वे कपड़े जो उसके बदन को ढकते थे, लेकिन उसकी सुंदरता को उभारते थे। साड़ी की सिलवटें जब हवा में लहरातीं, तो अमन की नजरें उसके कर्व्स पर टिक जातीं, लेकिन कभी इतना खुला नहीं देखा था। आज पहली बार वह उसे इस रूप में देख रहा था, और यह दृश्य उसकी उत्तेजना को चरम पर पहुंचा रहा था। कमरे में वह एक काली परछाई के रूप में दिख रही थी, लेकिन अमन की कल्पना उसके गोरे बदन को रंग दे रही थी – वह गोरा रंग जो दूधिया लगता, मुलायम त्वचा जो रेशम जैसी। वह अंजलि के सम्मोहन में खो रहा था, जैसे कोई जादू हो।
अंजलि मटकती हुई उसके पास चली आ रही थी। अमन ने सैकड़ों बार उसे चलते देखा था – सामान्य चाल, जो शालीन और आकर्षक थी। लेकिन आज यह चाल कातिलाना लग रही थी – हर कदम में उसकी कमर की लहर, कूल्हों की हल्की सी हलचल, जैसे कोई संगीत बज रहा हो। चलते समय उसके ब्रा के ऊपर से उसके बूब्स हिल रहे थे – वे गोल, पूर्ण, और इतने मनमोहन कि अमन की नजरें उनसे हट नहीं रही थीं। ब्रा की चमकती धारियां उन्हें और उभार रही थीं, जैसे कोई रत्न। अंजलि ने थॉन्ग पैंटी पहन रखी थी – पतली, जो उसके कर्व्स को और ज्यादा सेक्सी बना रही थी। जब उसकी कमर हिलती, तो पैंटी की धारियां चमकतीं, और अमन को लगा जैसे कोई आग लग रही हो। अमन इस समय पलंग पर बैठा हुआ था, उसके हाथ हल्के से कांप रहे थे, और शरीर में एक गर्म लहर दौड़ रही थी।
अंजलि चलकर उसके सामने खड़ी हो गई। उसकी सांसें तेज थीं, लेकिन चुप्पी थी – जैसे कोई रहस्य छिपा हो। अमन ने बड़े प्यार से अपना सीधा हाथ उठाया और कामुक तरीके से अंजलि के पेट और कमर पर फेरने लगा। उसकी त्वचा इतनी मुलायम थी – जैसे मखमल, गर्म और नरम। अमन के स्पर्श से अंजलि की एक हल्की सी सिसकारी निकल गई, जिसे उसने अपने मुंह से दबा लिया – लेकिन अमन ने सुना। यह सिसकारी उसके लिए संगीत थी, जो बता रही थी कि अंजलि भी इस पल के लिए लंबे समय से इंतजार कर रही थी। वह अपने आप को रोक रही थी, शर्म और डर से, लेकिन अब वह बंधन टूट रहे थे। अमन को एहसास हो रहा था कि अंजलि की त्वचा पर हर स्पर्श एक नई उत्तेजना पैदा कर रहा था – उसकी कमर की वक्रता, पेट की सपाट मुलायमियत, सब कुछ परफेक्ट।
अमन ने अपना हाथ अंजलि के पेट से हटाया, और फिर दोनों हाथों से उसकी कमर को पकड़ लिया – मजबूती से, लेकिन प्यार से। वह अपना मुंह उसके पेट के पास लाया और उसे तीन-चार चुंबन दे दिए। पहला चुंबन जब उसके होंठों ने अंजलि के पेट को छुआ, तो अमन को लगा जैसे कोई बिजली दौड़ी हो। अंजलि का शरीर कांप उठा – एक हल्की सी कंपकंपी, जो उसके पूरे बदन में फैल गई। इससे साफ पता चल रहा था कि अपने पति के अलावा अंजलि यह पहली बार किसी और के साथ कर रही है। वह ज्यादा उत्तेजित थी, घबराई हुई, लेकिन इच्छा से भरी। उसकी सांसें तेज हो गईं, और अमन को लगा जैसे वह उसकी गर्मी महसूस कर रहा हो।
पेट को चूमने के बाद अमन ने अंजलि को घुमा दिया। अब उसके सामने अंजलि के गोल-गोल नितंब थे – पूर्ण, चिकने, और इतने आकर्षक कि अमन की नजरें उन पर ठहर गईं। उसने अपने दोनों हाथ उन पर फेरने शुरू कर दिए – धीरे-धीरे, हर इंच को महसूस करते हुए। अंजलि के नितंब बहुत चिकने थे, जैसे कोई मिट्टी की मूर्ति जिसे परफेक्ट तरीके से गढ़ा गया हो। अमन ने महसूस किया कि वे उसकी पूर्व गर्लफ्रेंड्स रानी और शीला की तरह ही कोमल थे – लेकिन अंजलि में एक अलग ही आकर्षण था, शायद उसकी परिपक्वता का। कुछ देर तक उनसे खेलने के बाद – मसलते हुए, दबाते हुए – अमन ने अपनी हॉट (हाथ) अंजलि के सीधे तरफ के नितंब पर रख दिया और उसे चूमने लगा। होंठों का स्पर्श इतना नरम था कि अंजलि की एक और सिसकारी निकली। फिर अमन ने उल्टी तरफ के नितंब पर अपने होंठ लगाकर चूमने लगा। इसके बाद उसने अपनी जीभ निकाल कर उसके नितंबों को चाटना शुरू कर दिया – जीभ की गर्मी और नमी से अंजलि का शरीर और कांप उठा। अमन को यह बहुत अच्छा लग रहा था, और अंजलि को भी पसंद आ रहा था – क्योंकि वह अपना एक हाथ अमन के बालों में डालकर उनसे खेल रही थी, धीरे-धीरे खींचते हुए, जैसे प्रोत्साहन दे रही हो।
इसके बाद अमन ने अंजलि से कहा, "तुम एक बार चलकर गेट के पास जाओ और फिर लौटकर आओ।" उसकी आवाज में एक आज्ञा थी, लेकिन प्यार भरी। अंजलि ने ऐसा ही किया – वह मटकती हुई गेट के पास गई, उसके कदमों की आवाज फर्श पर हल्की गूंज पैदा कर रही थी, और फिर से मटकती हुई अमन के पास आ गई। अमन ने यह सब इसलिए किया था क्योंकि वह अंजलि को पीछे से चलते हुए देखना चाहता था – उसके नितंबों की हलचल, ऊपर-नीचे होते हुए, जैसे कोई लहर। यह दृश्य पहले से ज्यादा सुंदर था – नीली रोशनी में चमकते पैंटी के धागे उसके हर मूवमेंट को हाइलाइट कर रहे थे। अमन के मन में एक गहरा आकर्षण जाग रहा था, जैसे वह किसी सपने में हो।
अमन ने गौर किया कि अंजलि बिल्कुल भी कुछ नहीं बोल रही थी – वह पूरी तरह से खामोश हो गई थी। उसकी चुप्पी में शर्म थी, घबराहट थी, लेकिन साथ ही समर्पण भी। अमन को लगा कि वह शर्मा रही है, इसलिए कुछ नहीं बोल रही, लेकिन जो वह कह रहा है, वह कर रही है – इस समय के लिए यही काफी है। जब उसकी झिझक खुल जाएगी, तो वह बात करने लगेगी, हंसने लगेगी, और ज्यादा खुल जाएगी।
अमन खड़ा हुआ और अपना एक हाथ अंजलि के चेहरे और गले पर फेरा – धीरे से, जैसे कोई कीमती चीज छू रहा हो। उसकी त्वचा गर्म थी, और गले की नसें तेज धड़क रही थीं। फिर उसने अपने दोनों हाथ उसके सीने पर फेरने शुरू कर दिए – उसके एब्स, जो मजबूत और आकर्षक थे। अंजलि जिस तरह से उन पर हाथ फेर रही थी, अमन को साफ पता चल रहा था कि उसे उसके एब्स पसंद आ रहे हैं – उसकी उंगलियां हर मसल को ट्रेस कर रही थीं। अमन ने अपना हाथ पीछे कर लिया, लेकिन अंजलि ने प्यार से उसके सीने पर हाथ फेरना जारी रखा और फिर झुककर कई जगह उसकी छाती पर किस किया – गर्म, नरम चुंबन, जो अमन की त्वचा पर आग लगा रहे थे।
अमन को लग रहा था कि अब अंजलि धीरे-धीरे खुल रही है – उसकी चुप्पी टूट रही थी, और शरीर की भाषा बोल रही थी। जब अंजलि संतुष्ट हो गई, तो उसने अमन को छोड़ दिया। अमन ने अंजलि को बेड पर सीधा लेटने के लिए कहा। अंजलि पलंग के ऊपर गई – उसके कदम हल्के, लेकिन आत्मविश्वास से भरे – और पलंग पर जाकर सीधा लेट गई। चादर उसके बदन के नीचे सरसराई, और नीली रोशनी में उसका सिल्हूट और ज्यादा मोहक लग रहा था।
अमन ने जल्दी से अपनी शर्ट उतारी – बटन एक-एक करके खोलते हुए, जैसे कोई रस्म। शर्ट साइड में रखी, और फिर आराम से अपना लोअर उतार कर साइड में रख दिया। लोअर की जेब में दो कंडोम और कई डार्क चॉकलेट रखी हुई थी। अब अमन केवल बॉक्सर में था – उसका शरीर मजबूत, लेकिन इस रोशनी में छायादार। वह पलंग के ऊपर आया, और अंजलि के पैरों की तरफ चला गया। वह उसके दोनों पैरों को चूमता हुआ ऊपर की ओर चढ़ने लगा – पहले पैर की उंगलियां, फिर टखने, घुटने – हर चुंबन गर्म और धीमा। उसकी मुलायम जांघों को चूमता हुआ – जांघों की आंतरिक त्वचा इतनी संवेदनशील कि अंजलि की सांसें तेज हो गईं। उसके बाद पेट को चूमता हुआ बूब्स के पास आ गया, लेकिन बूब्स को छूए बिना – सिर्फ उनके बीच से गुजरते हुए – उसकी गर्दन को चूमता हुआ उसके गालों को चूमा।
अंजलि भी उसका पूरा साथ दे रही थी – वह अपने दोनों हाथों को कभी उसके बालों में डालकर खेलती, कभी उसकी पीठ पर फेरती – उसकी उंगलियां अमन की त्वचा पर खरोंच सी पैदा कर रही थीं, लेकिन सुखद। अब अमन अंजलि के ऊपर आ गया। उसने अंजलि के दोनों हाथों में अपनी उंगलियां फंसा लीं और उन्हें पलंग पर दबा दिया – मजबूती से, लेकिन प्रेम से। दोनों के बदन आपस में मिल चुके थे – अमन की छाती अंजलि के बूब्स से दब रही थी, ब्रा के माध्यम से। अंजलि ने अपनी दोनों टांगें खोल रखी थीं और उन्हें अमन की कमर के चारों ओर जकड़ लिया था – जैसे कोई बंधन। अंजलि की चूत पर पहनी पैंटी अमन के बॉक्सर के अंदर के लंड से चिपकी हुई थी – दोनों एक-दूसरे की गर्मी महसूस कर रहे थे, जैसे कोई आग सुलग रही हो। ऊपर तो दोनों का मिलन हो चुका था – अमन ने अपने होंठ अंजलि के मुलायम और कोमल होंठों पर रख दिए थे और दोनों एक-दूसरे को बेइंतहा तरीके से किस कर रहे थे। होंठों का मिलन गहरा था – जीभें आपस में लिपट रही थीं, सांसें मिश्रित। वे लगातार एक-दूसरे को किस कर रहे थे और अपने बदनों को आपस में रगड़ रहे थे – हर रगड़ से उत्तेजना बढ़ रही थी। यहां तक कि उनके चूत और लंड भी एक-दूसरे में समा जाने के लिए तड़प रहे थे; ऐसा लग रहा था कि अमन का लंड बॉक्सर फाड़कर अंजलि की चूत में समा जाएगा। अंजलि की चूत में इतनी आग लगी हुई थी कि वह इन कपड़ों के बंधन को जलाकर अमन के लंड को अपने अंदर ले लेगी। माहौल में सिर्फ उनकी सांसें, चुंबनों की आवाजें, और नीली रोशनी का जादू था – जैसे समय रुक गया हो।
अमन ने जैसे ही घर के मुख्य दरवाजे की कुंडी लगाई, उसके कानों में एक गहरा सन्नाटा गूंज उठा। घर, जो आम तौर पर परिवार की हलचल से भरा रहता था – रोहन की हंसी, टीवी की आवाजें, रसोई से आती खटपट – आज पूरी तरह से खाली और नीरस लग रहा था। सब बाहर मूवी देखने गए थे, और यह फैसला अचानक ही हुआ था, शायद किसी पारिवारिक उत्साह में। घर की दीवारें, जो सफेद प्लास्टर से ढकी हुई थीं और जगह-जगह परिवार की तस्वीरों से सजी हुईं, अब बस छायाओं में डूबी हुई लग रही थीं। हॉल की फर्श पर पड़े कालीन की मुलायमियत अमन के जूतों के नीचे दब गई, लेकिन कोई आवाज नहीं हुई – सिर्फ उसकी सांसों की हल्की गूंज। बाहर की सड़क से आने वाली गाड़ियों की दूर की आवाजें भी दीवारों से टकराकर मर जातीं, जैसे घर ने खुद को दुनिया से अलग कर लिया हो। हवा में एक हल्की सी ठंडक थी, क्योंकि शाम ढल चुकी थी और एयर कंडीशनर बंद था, लेकिन अमन के शरीर में एक अलग ही गर्मी फैल रही थी – उत्सुकता और घबराहट की मिली-जुली।
अंजलि ने उसे पहले ही बता दिया था: "गेस्ट रूम में इंतजार करूंगी। दरवाजा बंद करके पलंग पर बैठ जाना।" उसकी आवाज फोन पर कितनी नरम और रहस्यमयी लगी थी, जैसे कोई पुरानी किताब की पन्नों से निकली राज। अमन ने जल्दी से हॉल पार किया, उसके कदमों की आवाज फर्श पर हल्की गूंज पैदा कर रही थी। गेस्ट रूम घर के कोने में था, जहां आम तौर पर मेहमानों के लिए सजाया जाता था – सफेद चादरें, लकड़ी का मजबूत पलंग, और एक छोटा सा ड्रेसिंग टेबल। लेकिन आज यह कमरा अमन के लिए एक अलग दुनिया का द्वार लग रहा था।
दरवाजा खोलते ही अमन की आंखों पर अंधेरे का एक काला पर्दा गिर गया। कमरे में कोई रोशनी नहीं थी – न खिड़की से आती चांदनी, न कोई लैंप। सिर्फ दरवाजे से आती हॉल की हल्की पीली रोशनी कमरे में एक पतली सी रेखा बनाकर फैल रही थी, जो फर्श पर लकड़ी के पैटर्न को हल्का सा उजागर कर रही थी। हवा में एक हल्की सी सुगंध थी – अंजलि की परफ्यूम की, जो गुलाब और चंदन की मिश्रित लग रही थी, लेकिन इतनी हल्की कि अमन को लगा जैसे वह सपना देख रहा हो। बेड पर कोई नहीं था; सिर्फ चादर की सिलवटें, जो दिन की सफाई के बाद बनी हुई थीं। अमन को लगा कि अंजलि शायद बाथरूम में है – कमरे के कोने में लगा छोटा सा बाथरूम, जहां टाइल्स ठंडी और सफेद थीं, और शॉवर से पानी की बूंदें अभी भी टपक रही होंगी। वह जानता था कि अंजलि ऐसी है – जो अपने वादे पर खरी उतरती है। अगर वह उसके कहे अनुसार नहीं करेगा, तो शायद वह सामने नहीं आएगी। यह विचार अमन के मन में एक रोमांच पैदा कर रहा था, जैसे कोई खेल जिसमें नियम छिपे हुए हैं।
अमन ने जल्दी से कमरे में कदम रखा और दरवाजा बंद कर लिया। क्लिक की आवाज के साथ ही कमरा पूरी तरह से अंधेरे में डूब गया। अब कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था – न पलंग की आउटलाइन, न दीवारें, न छत। सिर्फ अमन की सांसें, जो तेज हो रही थीं, और उसके दिल की धड़कन, जो कानों में गूंज रही थी। कमरे की हवा स्थिर थी, लेकिन अमन को लगा जैसे कोई अदृश्य स्पर्श उसे छू रहा हो – उत्सुकता का स्पर्श। उसे पता था कि पलंग कहां है; वह पहले कई बार इस कमरे में आ चुका था, लेकिन कभी ऐसे माहौल में नहीं। वह अंधेरे में टटोलते हुए चला, उसके हाथ हवा में लहराए, और आखिरकार पलंग का किनारा मिला। चादर की मुलायम साटन जैसी बनावट उसके हाथों को छू गई, और वह बैठ गया। पलंग हल्का सा डूबा, जैसे अमन के वजन से सहमत हो। अमन सोच रहा था कि अब अंजलि बाथरूम से बाहर आएगी – उसकी कल्पना में वह सफेद तौलिए में लिपटी हुई, बाल गीले, आंखें चमकती हुई। लेकिन अभी सन्नाटा था, सिर्फ उसकी अपनी सांसें।
अचानक, कमरे में एक हल्की सी क्लिक की आवाज हुई, और नाइट बल्ब जल उठा। पूरे कमरे में एक गहरा नीला रंग फैल गया – जैसे कोई समुद्र की गहराई में डूबा हो। यह रोशनी इतनी मद्धम और रहस्यमयी थी कि सब कुछ छायाओं में डूबा लग रहा था; दीवारें नीली हो गईं, पलंग की चादरें नीली, और हवा में भी एक नीली धुंध सी फैल गई। अमन की आंखें इस रोशनी में समायोजित होने लगीं, और उसकी नजर लाइट के बोर्ड की तरफ गई – कमरे के कोने में लगा स्विच बोर्ड, जहां से रोशनी नियंत्रित होती थी। वहां अंजलि खड़ी थी।
कमरे की यह नीली रोशनी इतनी गहरी थी कि अंजलि का शरीर एक काली परछाई जैसा लग रहा था – उसकी आकृति स्पष्ट, लेकिन विवरण छिपे हुए। अमन को उसका चेहरा बिल्कुल नहीं दिख रहा था; सिर्फ एक काला सिल्हूट, जहां आंखें, नाक, होंठ सब विलीन हो गए थे। यहां तक कि उसका गोरा बदन, जो अमन ने पहले कई बार कल्पना में देखा था, अब काला लग रहा था – जैसे कोई रात की देवी। लेकिन अमन का ध्यान इस पर नहीं था। उसका ध्यान तो अंजलि के पूरे बदन पर था। दरअसल, कमरा नीली रोशनी से नहाया हुआ था, और अंजलि बोर्ड के पास खड़ी थी, लेकिन उसने अपने शरीर पर केवल ब्रा और पैंटी पहन रखी थी। यह दृश्य अमन को स्तब्ध कर रहा था। ब्रा और पैंटी रेडियम के धागों से बनी हुई थीं – वे धागे जो अंधेरे में चमकते हैं, और नीली रोशनी पड़ने पर वे और ज्यादा चमक उठते हैं। इस रोशनी में वे चमक रही थीं, जैसे कोई आकाशगंगा अंजलि के शरीर के चारों ओर फैली हो। अंजलि किसी स्वर्ग से उतरी अप्सरा लग रही थी – उसकी आकृति इतनी मोहक कि अमन की सांसें रुक सी गईं।
अमन ने आज तक अंजलि को सिर्फ सलवार-कुर्ती या साड़ी में देखा था – वे कपड़े जो उसके बदन को ढकते थे, लेकिन उसकी सुंदरता को उभारते थे। साड़ी की सिलवटें जब हवा में लहरातीं, तो अमन की नजरें उसके कर्व्स पर टिक जातीं, लेकिन कभी इतना खुला नहीं देखा था। आज पहली बार वह उसे इस रूप में देख रहा था, और यह दृश्य उसकी उत्तेजना को चरम पर पहुंचा रहा था। कमरे में वह एक काली परछाई के रूप में दिख रही थी, लेकिन अमन की कल्पना उसके गोरे बदन को रंग दे रही थी – वह गोरा रंग जो दूधिया लगता, मुलायम त्वचा जो रेशम जैसी। वह अंजलि के सम्मोहन में खो रहा था, जैसे कोई जादू हो।
अंजलि मटकती हुई उसके पास चली आ रही थी। अमन ने सैकड़ों बार उसे चलते देखा था – सामान्य चाल, जो शालीन और आकर्षक थी। लेकिन आज यह चाल कातिलाना लग रही थी – हर कदम में उसकी कमर की लहर, कूल्हों की हल्की सी हलचल, जैसे कोई संगीत बज रहा हो। चलते समय उसके ब्रा के ऊपर से उसके बूब्स हिल रहे थे – वे गोल, पूर्ण, और इतने मनमोहन कि अमन की नजरें उनसे हट नहीं रही थीं। ब्रा की चमकती धारियां उन्हें और उभार रही थीं, जैसे कोई रत्न। अंजलि ने थॉन्ग पैंटी पहन रखी थी – पतली, जो उसके कर्व्स को और ज्यादा सेक्सी बना रही थी। जब उसकी कमर हिलती, तो पैंटी की धारियां चमकतीं, और अमन को लगा जैसे कोई आग लग रही हो। अमन इस समय पलंग पर बैठा हुआ था, उसके हाथ हल्के से कांप रहे थे, और शरीर में एक गर्म लहर दौड़ रही थी।
अंजलि चलकर उसके सामने खड़ी हो गई। उसकी सांसें तेज थीं, लेकिन चुप्पी थी – जैसे कोई रहस्य छिपा हो। अमन ने बड़े प्यार से अपना सीधा हाथ उठाया और कामुक तरीके से अंजलि के पेट और कमर पर फेरने लगा। उसकी त्वचा इतनी मुलायम थी – जैसे मखमल, गर्म और नरम। अमन के स्पर्श से अंजलि की एक हल्की सी सिसकारी निकल गई, जिसे उसने अपने मुंह से दबा लिया – लेकिन अमन ने सुना। यह सिसकारी उसके लिए संगीत थी, जो बता रही थी कि अंजलि भी इस पल के लिए लंबे समय से इंतजार कर रही थी। वह अपने आप को रोक रही थी, शर्म और डर से, लेकिन अब वह बंधन टूट रहे थे। अमन को एहसास हो रहा था कि अंजलि की त्वचा पर हर स्पर्श एक नई उत्तेजना पैदा कर रहा था – उसकी कमर की वक्रता, पेट की सपाट मुलायमियत, सब कुछ परफेक्ट।
अमन ने अपना हाथ अंजलि के पेट से हटाया, और फिर दोनों हाथों से उसकी कमर को पकड़ लिया – मजबूती से, लेकिन प्यार से। वह अपना मुंह उसके पेट के पास लाया और उसे तीन-चार चुंबन दे दिए। पहला चुंबन जब उसके होंठों ने अंजलि के पेट को छुआ, तो अमन को लगा जैसे कोई बिजली दौड़ी हो। अंजलि का शरीर कांप उठा – एक हल्की सी कंपकंपी, जो उसके पूरे बदन में फैल गई। इससे साफ पता चल रहा था कि अपने पति के अलावा अंजलि यह पहली बार किसी और के साथ कर रही है। वह ज्यादा उत्तेजित थी, घबराई हुई, लेकिन इच्छा से भरी। उसकी सांसें तेज हो गईं, और अमन को लगा जैसे वह उसकी गर्मी महसूस कर रहा हो।
पेट को चूमने के बाद अमन ने अंजलि को घुमा दिया। अब उसके सामने अंजलि के गोल-गोल नितंब थे – पूर्ण, चिकने, और इतने आकर्षक कि अमन की नजरें उन पर ठहर गईं। उसने अपने दोनों हाथ उन पर फेरने शुरू कर दिए – धीरे-धीरे, हर इंच को महसूस करते हुए। अंजलि के नितंब बहुत चिकने थे, जैसे कोई मिट्टी की मूर्ति जिसे परफेक्ट तरीके से गढ़ा गया हो। अमन ने महसूस किया कि वे उसकी पूर्व गर्लफ्रेंड्स रानी और शीला की तरह ही कोमल थे – लेकिन अंजलि में एक अलग ही आकर्षण था, शायद उसकी परिपक्वता का। कुछ देर तक उनसे खेलने के बाद – मसलते हुए, दबाते हुए – अमन ने अपनी हॉट (हाथ) अंजलि के सीधे तरफ के नितंब पर रख दिया और उसे चूमने लगा। होंठों का स्पर्श इतना नरम था कि अंजलि की एक और सिसकारी निकली। फिर अमन ने उल्टी तरफ के नितंब पर अपने होंठ लगाकर चूमने लगा। इसके बाद उसने अपनी जीभ निकाल कर उसके नितंबों को चाटना शुरू कर दिया – जीभ की गर्मी और नमी से अंजलि का शरीर और कांप उठा। अमन को यह बहुत अच्छा लग रहा था, और अंजलि को भी पसंद आ रहा था – क्योंकि वह अपना एक हाथ अमन के बालों में डालकर उनसे खेल रही थी, धीरे-धीरे खींचते हुए, जैसे प्रोत्साहन दे रही हो।
इसके बाद अमन ने अंजलि से कहा, "तुम एक बार चलकर गेट के पास जाओ और फिर लौटकर आओ।" उसकी आवाज में एक आज्ञा थी, लेकिन प्यार भरी। अंजलि ने ऐसा ही किया – वह मटकती हुई गेट के पास गई, उसके कदमों की आवाज फर्श पर हल्की गूंज पैदा कर रही थी, और फिर से मटकती हुई अमन के पास आ गई। अमन ने यह सब इसलिए किया था क्योंकि वह अंजलि को पीछे से चलते हुए देखना चाहता था – उसके नितंबों की हलचल, ऊपर-नीचे होते हुए, जैसे कोई लहर। यह दृश्य पहले से ज्यादा सुंदर था – नीली रोशनी में चमकते पैंटी के धागे उसके हर मूवमेंट को हाइलाइट कर रहे थे। अमन के मन में एक गहरा आकर्षण जाग रहा था, जैसे वह किसी सपने में हो।
अमन ने गौर किया कि अंजलि बिल्कुल भी कुछ नहीं बोल रही थी – वह पूरी तरह से खामोश हो गई थी। उसकी चुप्पी में शर्म थी, घबराहट थी, लेकिन साथ ही समर्पण भी। अमन को लगा कि वह शर्मा रही है, इसलिए कुछ नहीं बोल रही, लेकिन जो वह कह रहा है, वह कर रही है – इस समय के लिए यही काफी है। जब उसकी झिझक खुल जाएगी, तो वह बात करने लगेगी, हंसने लगेगी, और ज्यादा खुल जाएगी।
अमन खड़ा हुआ और अपना एक हाथ अंजलि के चेहरे और गले पर फेरा – धीरे से, जैसे कोई कीमती चीज छू रहा हो। उसकी त्वचा गर्म थी, और गले की नसें तेज धड़क रही थीं। फिर उसने अपने दोनों हाथ उसके सीने पर फेरने शुरू कर दिए – उसके एब्स, जो मजबूत और आकर्षक थे। अंजलि जिस तरह से उन पर हाथ फेर रही थी, अमन को साफ पता चल रहा था कि उसे उसके एब्स पसंद आ रहे हैं – उसकी उंगलियां हर मसल को ट्रेस कर रही थीं। अमन ने अपना हाथ पीछे कर लिया, लेकिन अंजलि ने प्यार से उसके सीने पर हाथ फेरना जारी रखा और फिर झुककर कई जगह उसकी छाती पर किस किया – गर्म, नरम चुंबन, जो अमन की त्वचा पर आग लगा रहे थे।
अमन को लग रहा था कि अब अंजलि धीरे-धीरे खुल रही है – उसकी चुप्पी टूट रही थी, और शरीर की भाषा बोल रही थी। जब अंजलि संतुष्ट हो गई, तो उसने अमन को छोड़ दिया। अमन ने अंजलि को बेड पर सीधा लेटने के लिए कहा। अंजलि पलंग के ऊपर गई – उसके कदम हल्के, लेकिन आत्मविश्वास से भरे – और पलंग पर जाकर सीधा लेट गई। चादर उसके बदन के नीचे सरसराई, और नीली रोशनी में उसका सिल्हूट और ज्यादा मोहक लग रहा था।
अमन ने जल्दी से अपनी शर्ट उतारी – बटन एक-एक करके खोलते हुए, जैसे कोई रस्म। शर्ट साइड में रखी, और फिर आराम से अपना लोअर उतार कर साइड में रख दिया। लोअर की जेब में दो कंडोम और कई डार्क चॉकलेट रखी हुई थी। अब अमन केवल बॉक्सर में था – उसका शरीर मजबूत, लेकिन इस रोशनी में छायादार। वह पलंग के ऊपर आया, और अंजलि के पैरों की तरफ चला गया। वह उसके दोनों पैरों को चूमता हुआ ऊपर की ओर चढ़ने लगा – पहले पैर की उंगलियां, फिर टखने, घुटने – हर चुंबन गर्म और धीमा। उसकी मुलायम जांघों को चूमता हुआ – जांघों की आंतरिक त्वचा इतनी संवेदनशील कि अंजलि की सांसें तेज हो गईं। उसके बाद पेट को चूमता हुआ बूब्स के पास आ गया, लेकिन बूब्स को छूए बिना – सिर्फ उनके बीच से गुजरते हुए – उसकी गर्दन को चूमता हुआ उसके गालों को चूमा।
अंजलि भी उसका पूरा साथ दे रही थी – वह अपने दोनों हाथों को कभी उसके बालों में डालकर खेलती, कभी उसकी पीठ पर फेरती – उसकी उंगलियां अमन की त्वचा पर खरोंच सी पैदा कर रही थीं, लेकिन सुखद। अब अमन अंजलि के ऊपर आ गया। उसने अंजलि के दोनों हाथों में अपनी उंगलियां फंसा लीं और उन्हें पलंग पर दबा दिया – मजबूती से, लेकिन प्रेम से। दोनों के बदन आपस में मिल चुके थे – अमन की छाती अंजलि के बूब्स से दब रही थी, ब्रा के माध्यम से। अंजलि ने अपनी दोनों टांगें खोल रखी थीं और उन्हें अमन की कमर के चारों ओर जकड़ लिया था – जैसे कोई बंधन। अंजलि की चूत पर पहनी पैंटी अमन के बॉक्सर के अंदर के लंड से चिपकी हुई थी – दोनों एक-दूसरे की गर्मी महसूस कर रहे थे, जैसे कोई आग सुलग रही हो। ऊपर तो दोनों का मिलन हो चुका था – अमन ने अपने होंठ अंजलि के मुलायम और कोमल होंठों पर रख दिए थे और दोनों एक-दूसरे को बेइंतहा तरीके से किस कर रहे थे। होंठों का मिलन गहरा था – जीभें आपस में लिपट रही थीं, सांसें मिश्रित। वे लगातार एक-दूसरे को किस कर रहे थे और अपने बदनों को आपस में रगड़ रहे थे – हर रगड़ से उत्तेजना बढ़ रही थी। यहां तक कि उनके चूत और लंड भी एक-दूसरे में समा जाने के लिए तड़प रहे थे; ऐसा लग रहा था कि अमन का लंड बॉक्सर फाड़कर अंजलि की चूत में समा जाएगा। अंजलि की चूत में इतनी आग लगी हुई थी कि वह इन कपड़ों के बंधन को जलाकर अमन के लंड को अपने अंदर ले लेगी। माहौल में सिर्फ उनकी सांसें, चुंबनों की आवाजें, और नीली रोशनी का जादू था – जैसे समय रुक गया हो।