दोस्त का परिवार compleet family sex story

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Nitin
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Re: दोस्त का परिवार compleet family sex story

Unread post by Nitin » 26 Apr 2018 09:30

दोस्त का परिवार पार्ट--3

गतान्क से आगे.............


जैसे ही मेरा उंगली उनके चूत के दाने से टकराया उन्होने ज़ोर से सिसकारी ले कर अपनी जाँघो को कस कर बंद कर लिया और चूतर उठा उठा कर मेरे हाथ को चोदने लगी.


कुच्छ देर बाद उनकी चूत से पानी बह रहा था. थोरी देर तक ऐसे ही मज़ा लेने के बाद मैने अपनी उंगली उनकी चूत से बाहर निकाल लिया और सीधा हो कर उनके उपर लेट गया. उन्होने अपनी टाँगे फैला दी और मेरे फरफ़रते हुए लंड को पकड़ कर सुपरा चूत के मुहाने पर रख लिया. उनकी झांतो का स्पर्श मुझे पागल बना रहा था, फिर मा ने कहा “अब अपना लॉरा मेरी बुर मे घुसाओ, प्यार से घुसेरना नही तो मुझे दर्द होगा, अहह!” मैं नौसीखिया था इसीलिए शुरू शुरू मे मुझे अपना लंड उनकी टाइट चूत मे घुसाने मे काफ़ी परेशानी हुई. मैने जब ज़ोर लगा कर लंड अंदर डालना चाहा तो उन्हे दर्द भी हुआ. लेकिन पहले से उंगली से चुदवा कर उनकी चूत काफ़ी गीली हो गयी थी.


फिर मा अपने हाथ से लंड को निशाने पर लगा कर रास्ता दिखा रही थी और रास्ता मिलते ही मेरा एक ही धक्के मे सुपरा अंदर चला गया. इससे पहले की मा संभले , मैने दूसरा धक्का लगाया और पूरा का पूरा लंड मक्खन जैसी चूत की जन्नत मे दाखिल हो गया. मा चिल्लइ, “उईईइ ईईईईईई ईईईई माआआ उहुहुहह ओह बता, ऐसे ही कुछ देर हिलना डुलना नही, हाई! बरा जालिम है तुम्हारा लंड. मार ही डाला मुझे तुमने दीनू.” मैने सोचा लगता है मा को काफ़ी दर्द हो रहा है.


पहेली बार जो इतना मोटा और लंबा लंड उनके बुर मे घुसा था. मैं अपना लंड उनकी चूत मे घुसा कर चुप चाप पड़ा था. मा की चूत फदाक रही थी और अंदर ही अंदर मेरे लौरे को मसल रही थी. उनकी उठी उठी चूंचिया काफ़ी तेज़ी से उपर नीचे हो रही थी. मैने हाथ बढ़ा कर दोनो चूंची को पकाद लिया और मुँह मे लेकर चूसने लगा. थोड़ी देर बाद मा को कुछ राहत मिली और उन्होने कमर हिलानी शुरू कर दी और मुझसे बोली, “बेटा शुरू करो, चोदो मुझे. लेलो मज़ा जवानी का मेरे राज्ज्ज्जा,” और अपनी गंद हिलाने लगी.


मैं थोडा अनारी. समझ नहीं पाया कि कैसे शुरू करूँ. पहले अपनी कमर उपर किया तो लंड चूत से बाहर आ गया. फिर जब नीचे किया तो ठीक निशाने पर नही बैठा और मा की चूत को रगदता हुआ नीचे फिसल कर गंद मे जाकर फँस गया. मैने दो तीन धक्के लगाया पर लंड चूत मे वापस जाने की बजाय फिसल कर गंद मे चला जाता. मा से रहा नही गया और तिलमिला कर ताना देती हुई बोली, “ अनारी से चुदवाना चूत का सत्यानाश करवाना होता है, अरे मेरे भोले दीनू बेटे ज़रा ठीक से निशाना लगा कर अंदर डालो नही तो चूत के उपर लॉरा रगर रगर कर झार जाऊगे.” मैं बोला, “ अपने इस अनारी बेटे को कुछ सिख़ाओ, जिंदगी भर तुम्हे अपना गुरु मानूँगा और जब चाहोगी मेरे लंड की दक्षिणा दूँगा.”


मा लंबी सांस लेती हुए बोली, “हाँ बेटे, मुझे ही कुछ करना होगा नही तो और मेरा हाथ अपनी चूंची पर से हटाया और मेरे लंड पर रखती हुई बोली, “इससे पकड़ कर मेरी चूत के मुँह पर रखो और लगाओ धक्का ज़ोर से.” मैने वैसे ही किया और मेरा लंड उनकी चूत को चीरता हुआ पूरा का पूरा अंदर चला गया. फिर वो बोली, “अब लंड को बाहर निकालो, लेकिन पूरा नही. सुपरा अंदर ही रहने देना और फिर दोबारा पूरा लंड अंदर पेल देना, बस इसी तरह से करते रहो.”

मैने वैसे ही करना शुरू किया और मेरा लंड धीरे धीरे उनकी चूत मे अंदर-बाहर होने लगा. फिर मा ने स्पीड बढ़ा कर करने को कहा. मैने अपनी स्पीड बढ़ा दी और तेज़ी से लंड अंदर-बाहर करने लगा. मा को पूरी मस्ती आ रही थी और वो नीचे से कमर उठा उठा कर हर शॉट का जवाब देने लगी. लेकिन ज़यादा स्पीड होने से बार बार मेरा लंड बाहर निकल जाता. इससे चुदाई का सिलसिला टूट जाता.

आख़िर मा से रहा नही गया और करवट ले कर मुझे अपने उपर से उतार दिया और मुझको चित लेटा कर मेरे उपर चढ़ गयी.


अपनी जाँघो को फैला कर बगल कर के अपने गद्देदार चूतर रखकर बैठ गयी. उनकी चूत मेरे लंड पर थी और हाथसे मेरी कमर को पकड़े हुए थी और बोली, “मैं दिखाती हूँ कि कैसे चोद्ते है,” और मेरे उपर लेट कर धक्का लगाया. मेरा लंड घाप से चूत के अंदर दाखिल हो गया. मा ने अपनी रसीली चूंची मेरी छाती पर रगर्ते हुए अपने गुलाबी होन्ट मेरे होन्ट पर रख दिए और मेरे मुँह मे जीभ डाल दी.


फिर उन्होने मज़े से कमर हिला हिला कर शॉट लगाना शुरू किया. बड़े कस कस कर शॉट लगा रही थी. चूत मेरे लंड को अपने मे समाए हुए तेज़ी से उपर नीचे हो रही थी. मुझे लग रहा था कि मैं जन्नत मे पहुँच गया हूँ. अब पोज़िशन उल्टी हो गयी थी. मा मानो मर्द थी जो कि अपनी मसूका को कस कस कर चोद रहा था. जैसे जैसे मा की मस्ती बढ़ रही थी उनके शॉट भी तेज़ होते जा रहे थे.


अब वो मेरे उपर मेरे कंधो को पकड़ कर घुटने के बल बैठ गयी और ज़ोर ज़ोर से कमर हिला कर लंड को तेज़ी से अंदर-बाहर लेने लगी. उनका सारा बदन हिल रहा था और साँसे तेज़ तेज़ चल रही थी. मा की चूंचीआ तेज़ी से उपर नीचे हो रही थी. मुझसे रहा नही गया और हाथ बढ़ा कर दोनो चूंची को पकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगा.


मा एक साधे हुए खिलाड़ी की तरह कमान अपने हाथो मे लिए हुए कस कस कर शॉट लगा रही थी. जैसे जैसे वो झरने के करीब आ रही थी उनकी रफ़्तार बढ़ती जा रही थी. कमरे मे फ़च फ़च की आवाज़ गूँज रही थी. जब उनकी सांस फूल गयी तो खुद नीचे आकर मुझे अपने उपर खीच लिया और टाँगो को फैला कर उपर उठा लिया और बोली, “मैं थक गयी मेरे राज्ज्ज्जा, अब तुम मोर्चा सम्भालो.”मैं झट उनकी जाँघो के बीच बैठ गया और निशाना लगा कर झटके से लंड चूत के अंदर डाल दिया और उनके उपर लेट कर दनादन शॉट लगाने लगा.


मा ने अपनी टांग को मेरी कमर पर रख कर मुझे जाकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से चूतर उठा उठा कर चुदाई मे साथ देने लगी. मैं भी अब उतना अनारी नही रहा और उनकी चूंची को मसल्ते हुए दनादन शॉट लगा रहा था. पूरा कमरा हमारी चुदाई की आवाज़ से गूँज उठा था. मा अपनी कमर हिला कर चूतर उठा उठा कर चुदवा रही थी और बोले जा रही थी, “आह आअहह उनह ऊओह ऊऊहह हाआआं हययाआयी मीईरए राज्ज्जज्जा, माआआअर गाययययययए रीईए, ललल्ल्ल्ल्ल चूऊओद रे चूऊओद. उईईईईईई मीईईरीईई माआअ, फ़ाआआअत गाआआईई रीईई आआआज तो मेरी चूत. मीईएरा तो दम निकककककल दिया तुउउउउने तूऊ आआज. बारयाआया जाआअलीएम हाआऐरे तुउउउंहाआआरा लौरा, मैं भी बोल रहा था, “लीईए मेरिइई रनीई, लीई लीईए मेरा लॉरा अप्नीईइ चूत मीईए. बारयाआया तरपेयययययया है तूने मुझे. ले ले, ले मेरिइई राआआआआनि यह लंड आब्ब्ब्बब तेरा शाइयियी है. अहह! उहह क्या जन्नत का मज़ाआअ सिखाया तूने.


मैं तो तेरा गुलाम हू गयाआ.”मा गंद उछाल उछाल कर मेरा लंड अपनी चूत मे ले रही थी और मैं भी पूरे जोश के साथ उनकी चुन्चिओ को मसल मसल कर अपने गहरे दोस्त की मा की गहरी चुदाई कर रहा था.


मा मुझको ललकार कर कहती, लगाओ शॉट मेरे राजा”, और मैं जवाब देता, “यह ले मेरी रानी, ले ले अपनी चूत मे”. “ज़रा और ज़ोर से सरकाओ अपना लंड मेरी चूत मे मेरे राजा”, “यह ले मेरी रानी, यह लंड तो तेरे लिए ही है.” “देखो राज्ज्ज्जा मेरी चूत तो तेरे लंड की दीवानी हो गयी, और ज़ोर से और ज़ोर से आआईईईई मेरे राज्ज्जज्ज्ज्जा. मैं गइईईईई रीई,” कहते हुए मा ने मुझको कस कर अपनी बाहों मे जाकड़ लिया और उनकी चूत ने ज्वालामुखी का लावा छोड़ दिया.

अब तक मेरा भी लंड पानी छोड़ने वाला था और मैं बोला, “मैं भी अयाआआ मेरी जाआअन,” और मेने भी अपना लंड का पानी छोड़ दिया और मैं हाफ्ते हुए उनकी चूंची पर सिर रख कर कस के चिपक कर लेट गया. यह मेरी पहली चुदाई थी. इसीलिए मुझे काफ़ी थकान महसूस हो रही थी. मैं मा के सीने पर सर रख कर सो गया. वो भी एक हाथ से मेरे सिर को धीरे धीरे से सहलाते हुए दूसरे हाथ से मेरी पीठ सहला रही थी

कुछ देर बाद होश आया तो मैने उनके रसीले होंठो का चुंबन लेकर उन्हे जगाया. मा ने करवट लेकर मुझे अपने उपर से हटाया और मुझे अपनी बाहों मे कस कर कान मे फूस-फूसा कर बोली, “बेटा तुमने और तुम्हारे मोटे लंबे लंड नेतो कमाल कर दिया, क्या गजब का ताक़त है तुम्हारे लंड मे.” मैने उत्तर दिया, “कमाल तो आपने कर दिया है , आजतक तो मुझे मालूम ही नही था कि अपने लंड को इस्तेमाल कैसे करना है.


यह तो आपकी मेहेरबानी है जो कि आज मेरे लंड को आपकी चूत की सेवा करने का मौका मिला.” अबतक मेरा लंड उनकी चूत के बाहर झांतो के जंगल मे रगर मार रहा था. मा ने अपनी मुलायम हथेलिओं मे मेरा लंड को पकड़ कर सहलाना शुरू किया. उनकी उंगली मेरे आंडो से खेल रही थी. उनकी नाज़ुक उँगलिओ का स्पर्श पाकर मेरा लंड भी जाग गया और एक अंगराई लेकर मा की चूत पर ठोकर मारने लगा. मा ने कस कर मेरे लंड को क़ैद कर लिया और बोली, “बहुत जान है तुम्हारे लंड मे, देखो फिर से फड़-फादाने लगा, अब मैं इसको नहीं छोड़ूँगी.”


हम दोनो अगल बगल लेटे हुए थे. मा ने मुझको चित लेटा दिया, और मेरी टांग पर अपनी टांग चढ़ा कर लंड को हाथ से उमेठेने लगी. साथ ही साथ अपनी कमर हिलाते हुए अपनी झांट और चूत मेरी जाँघ पर रगर्ने लगी. उनकी चूत पिछली चुदाई से अभीतक गीली थी और उसका स्पर्श मुझे पागल बनाए हुए था. अब मुझसे रहा नही गया और करवट लेकर मा की तरफ मुँह करके लेट गया. उनकी चूंची को मुँह मे दबा कर चूस्ते हुए अपनी उंगली चूत मे घुसा कर सहलाने लगा. उन्होने एक सिसकारी लेकर मुझे कस कर चिप्टा लिया और ज़ोर ज़ोर से कमर हिलाते हुए मेरी उंगली से चुदवाने लगी. अपने हाथ से मेरे लंड को कस कर ज़ोर ज़ोर से मूठ मार रही थी.


मेरा लंड पूरे जोश मे आकर लोहे की तरह सख़्त हो गया था. अब मा की हद से ज़्यादा बेताबी बढ़ गयी थी और खुद चित हो कर मुझे अपने उपर खीच लिया. मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर रखती हुई बोली, “आओ मेरे राजा, सेकेंड राउंड हो जाए.”मैने झट कमर उठा कर धक्का दिया और मेरा लंड उनकी चूत को चीरता हुआ जड़ तक धँस गया. मा चिल्ला उठी और बोली, “जीओ मेरे राजा, क्या शॉट मारा है अब मेरे सिखाए हुए तरीके से शॉट पर शॉट मारो और फार दो मेरी चूत को.”

मा का आदेश पा-कर मैं दूने जोश मे आ गया और उनकी चूंची को पकड़ कर हुमच हुमच कर मा की चूत मे लंड पेलने लगा. उंगली की चुदाई से उनकी की चूत गीली हो गयी थी और मेरा लंड सतसट अंदर-बाहर हो रहा था. वो भी नीचे से कमर उठा उठा कर हर शॉट का जवाब पूरे जोश के साथ दे रही थी.


मा ने दोनो हाथो से मेरी कमर को पकड़ रखा था और ज़ोर ज़ोर से अपनी चूत मे लंड घुस्वा रही थी. वो मुझे इतना उठाती थी कि बस लंड का सुपरा अंदर रहता और फिर ज़ोर नीचे खिचति हुई घाप से लंड चूत मे घुस्वा लेती थी. पूरे कमरे मे हमारी सांस और घपा-घाप, फ़च-फ़च की आवाज़ गूँज रही थी. जब हम दोनो की ताल से ताल मिल गयी तब मा ने अपने हाथ नीचे लाकर मेरे चूतर को पकड़ लिया और कस कस कर दबोचते हुए मज़ा लेने लगी. कुछ देर बाद मा ने कहा, “आओ एक नया आसान सिखाती हूँ,” और मुझे अपने उपर से हटा कर किनारे कर दिया. मेरा लंड ‘पक’ की आवाज़ साथ बाहर निकल आया.


मैं चित लेटा हुआ था और मेरा लंड पूरे जोश के साथ सीधा खरा था. मा उठ कर घुटनो और हथेलिओं पर मेरे बगल मे बैठ गयी. मैं लंड को हाथ मे पकड़ कर उनकी हरकत देखता रहा. मा ने मेरा लंड पर से हाथ हटा कर मुझे खींचते हुए कहा, “ऐसे पड़े पड़े क्या देख रहे हो, चलो अब उठ कर पीछे से मेरी चूत मे अपना लंड को घुसाओ.” मैं भी उठ कर उनके के पीछे आकर घुटने के बल बैठ गया और लंड को हाथ से पकड़ कर उनकी चूत पर रगर्ने लगा.

क्या मस्त गोल गोल गद्दे दार गंद थी. मा ने जाँघ को फैला कर अपने चूतर उपर को उठा दिए जिससे कि उनकी रसीली चूत साफ नज़र आने लगी. उनका का इशारा समझ कर मैने लंड का सुपरा उनकी चूत पर रख कर धक्का दिया और मेरा लंड उनकी चूत को चीरता हुआ जड़ तक धँस गया.



मा ने एक सिसकारी भर कर अपनी गंद पीछे कर के मेरी जाँघ से चिपका दी. मैं भी मा की पीठ से चिपक कर लेट गया और बगल से हाथ डाल कर उनकी दोनो चुची को पकड़ कर मसल्ने लगा. वो भी मस्ती मे धीरे धीरे चूतर को आगे-पीछे करके मज़े लेने लगी. उनके मुलायम चूतर मेरी मस्ती को दोगुना कर रहे थे. मेरा लंड उनकी रसीली चूत मे आराम से आगे-पीछे हो रहा था.


कुछ देर तक चुदाई का मज़ा लेने के बाद मा बोली, “चलो राज्ज्जा अब आगे उठा कर शॉट लगाओ, अब रहा नही जाता.” मैं उठा कर सीधा हो गया और मा के चूतर को दोनो हाथों से कस कर पकड़ कर चूत मे हमला शुरू कर दिया. जैसा कि मा ने सिखाया था मैं पूरा लंड धीरे से बाहर निकाल कर ज़ोर से अंदर कर देता.

शुरू मे तो मैने धीरे धीरे किया लेकिन जोश बढता गया और धक्को की रफ़्तार बढ़ती गयी. धक्का लगाते समय मैं मा के चूतर को कस के अपनी ओर खीच लेता ताकि शॉट तगरा परे. मा भी उसी रफ़्तार से अपने चूतर को आगे-पीछे कर रही थी. हम दोनो की साँसे तेज हो गयी थी. मा की मस्ती पूरे परवान पर थी.


नंगे जिस्म जब आपस मे टकराते तो घाप-घाप की आवाज़ आती. काफ़ी देर तक मैं उन्हे कमर पकड़ धक्का लगाता रहा. जब हालत बेकाबू होने लगी तब मा को फिर से चित लेटा कर उन पर सवार हो गया और चुदाई का दौर चालू रखा. हम दोनो ही पसीने से लथपथ हो गये थे पर कोइ भी रुकने का नाम नही ले रहा था.

तभी मा ने मुझे कस कर जाकड़ लिया और अपनी टाँगे मेरे चूतर पर रख दिया और कस कर ज़ोर ज़ोर से कमर हिलाते हुए चिपक कर झार गयी. उनके झरने के बाद मैं भी भाभी की चूंची को मसल्ते हुए झार गया और हाफ्ते हुए उनके उपर लेट गया. हम दोनो की साँसे ज़ोर ज़ोर से चल रही थी और हम दोनो काफ़ी देर तक एक-दूसरे से चिपक कर पड़े रहे.

Nitin
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Re: दोस्त का परिवार compleet family sex story

Unread post by Nitin » 26 Apr 2018 09:31

दोस्त का परिवार पार्ट--4

गतान्क से आगे.............

कुछ देर बाद मा बोली, “ बता कैसी लगी हमारी चूत की चुदाई?” मैं बोला, “हाई मेरा मन करता है कि जिंदगी भर इसी तरह से तुम्हारी चूत मे लंड डाले पड़ा रहूं.” मा बोली“जब तक तुम यहा हो, यह चूत तुम्हारी है, जैसे मर्ज़ी हो मज़े लो, अब थोरे देर आराम करतें है.” “नही मा, कम से कम एक बार और हो जाए.


देखो मेरा लंड अभी भी बेकरार है.” मा ने मेरे लंड को पकड़ कर कहा, “यह तो ऐसे रहेगा ही, चूत की खुसबु जो मिल गयी है. पर देखो रात के तीन बज गये है, अगर सुबह टाइम से नही उठें तो तुम्हारी भुवा को शक गाएगा. अभी तो सारा दिन सामने है और आगे के इतने दिन हमारे है. जी भर कर मस्ती लेना.

मेरा कहा मनोगे तो रोज नया स्वाद चखाउन्गि.” मा का कहना मान कर मैने भी जीद छोड़ दी और मा भी करवट ले कर लेट गयी और मुझे अपने से सटा लिया. मैने भी उनकी गंद की दरार मे लंड फँसा कर चूंचीओ को दोनो हाथों मे पकड़ लिया और मा के कंधे को चूमता हुआ लेट गया.


नींद कब आई इसका पता ही नही चला.

सुबह जब अलार्म बजा तो मैने समय देखा, सुबह के सात बज रहे थी. मा ने मुस्कुरा कर देखा और एक गरमा-गरम चुंबन मेरे होटो पर जड़ दिया. मैने भी मा को जाकड़ कर उनके चुंबन का जोरदार का जवाब दिया. फिर मा उठ कर अपने रोज के काम काज मे लग गयी. वो बहुत खुश थी.


मैं उठ कर नहा धोकर फ्रेश होकर आँगन मैं बैठ कर नास्टा करने लगा. तभीभुवा आगयी. और बोली बेटा खेत चलोगे ? मैने कहा क्यों नहीं और रात वाला उनका ककड़ी से चोदने का सीन मेरी आँखों के सामने नाचने लगा. इतने मे सुमन (दोस्त की बहन) बोली मैं भी तुम्हारे साथ खेत मैं चलूंगी. और हम तीनो खेत की ओर चल पड़े. रास्ते मैं जब हम एक खेत के पास से गुजर रहे थे तो देखा कि उस खेत मैं ककाडियाँ उगी हुई थी.

मैने ककड़ियों को देखते हुवे भुवा से कहा “भुवा देखो इस खेत वाले ने तो ककाडियाँ उगाई हैं. और ककाड़ियों मैं काफ़ी गून होते हैं” भुवा लंबी सांस भरती हुई बोली “हां बेटा ककाड़ियों से काफ़ी फ़ायदा होता हैं और कई कामो में इसका उपयोग किया जाता हैं, जैसे सलाद में, सुबजियों में, कच्ची ककड़ी खाने के लिए भी इसका उपलोग किया जाता हैं” मैं बोला “हां भुवा, इसे कई तरह से उपयोग में लाया जाता है” इसतरह की बातें करते करते हम लोंग अपने खेत में पहुँच गये. वहाँ जाकर मैं मकान मैं गया और लूंघी और बनियान पहन कर वापस भुवा के पास आगेया.



भुआ खेत मैं काम कर रही थी और सुमन (दोस्त की बहन) उनके काम मैं मदद कर रही थी. मैने देखा भुवा की सारी घुटनो के उपर थी और सुमन स्कर्ट और ब्लाउस पहने हुवे थी. मैं भी लूंघी उँची करके (मद्रासी स्टाइल में) उनके साथ काम में मदद करने लगा.


जब सुमन झुकर काम करती तो मुझे उसकी चड्डी देखाई देती थी. हम लोग करीब 1 या 1:30 घंटे काम करते रहे फिर मैने भुवा से कहा भुवा मैं थोडा आराम करना चाहता हूँ तो भुवा बोली ठीक हैं और मैं खेत के मकान में आकर आराम करने लगा.

कुच्छ देर बाद कमरे मैं सुमन आई और कहने लगी दीनू भैया आप वहाँ बैठ जाइए क्यों कि कमरे मैं झारू मारनी हैं. और मैं कमरे के एक कोने मैं बैठ गया. और वो कमरे मैं झारू मारने लगी. झारू मारते समय जब सुमन झुकी तो फिर मुझे उसकी चड्डी दिखाई देने लगी. और उसकी चुदाई के ख़यालों मैं खो गया. थोड़ी देर बाद फिर वो बोली “भैया ज़रा पैर हटा लो झारू देनी है.”


मैं चौंक कर हक़ीकत की दुनिया मे वापस आया. देखा सुमन कमर पर हाथ रखे मेरे पास खरी है. मैं खरा हो गया और वो फिर झुक कर झारू लगाने लगी. मुझे फिर उसकी चड्डी दिखाई देने लगी. आज से पहले मैने उस पर धान नही दिया था.. पर आज की बात ही कुछ और ही थी. रात मा से चुदाई की ट्रैनिंग पाकर एक ही रात मे मेरा नज़रिया बदल गया था. अब मैं हर औरत को चुदाई की नज़र से देखना चाहता था. जब वो झारू लगा रही थी तो मैं उसके सामने आकर खड़ा होगया अब मुझे उसके ब्लाउस से उसकी चूंची साफ दिखाई दे रही थी. मेरा लंड फॅन-फ़ना गया. रात वाली मा जैसी चूंची मेरे दिमाग़ के सामने घूमने लगी.


तभी सुमन की नज़र मुझ पर पड़ी. मुझे एकटक घूरता पाकर उसने एक दबी सी मुस्कान दी और अपना ब्लाउस ठीक कर चुन्चिओ को ब्लाउस के अंदर छुपा लिया. अब वो मेरी तरफ पीठ कर के झारू लगा रही थी. उसके चूतर तो और भी मस्त थे. मैं मन ही मन सोचने लगा कि इसकी गंद मे लंड घुसा कर चूंची को मसल्ते हुए चोदने मे कितना मज़ा आएगा. बेखायाली मे मेरा हाथ मेरे तननाए हुए लंड पर पहुँच गया और मैं लूंघी के उपर से ही सुपारे को मसल्ने लगा. तभी सुमन अपना काम पूरा कर के पलटी और मेरे हरकत देख कर मुँह पर हाथ रख कर हँसती हुई बाहर चली गयी.

थोड़ी देर बाद भुवा और सुमन हाथ पैर धोकर आए और मुझे कहा कि चलो दीनू बेटे खाना ख़ालो. अब हम तीनो खाना खाने बैठ गये. भुवा मेरे सामने बैठी थी और सुमन मेरे लेफ्ट साइड की ओर बैठी थी. सुमन पालती मारकर बैठी थी और भुवा पैर पसारे बैठी थी. खाना खाते समय मैने कहा भुवा आज खाना तो जाएकेदार बना है. भुवा ने कहा मैने तुम्हारे लिए खास बनाया हैं. तुम यहाँ जितने दिन रहोगे गाओं का खाना खा खाकर और मोटे होजाओगे. मैं हंस पड़ा और कहा अगर ज़्यादा मोटा होऊँगा तो मुस्किल हो जाए गी.


भुवा आंड सुमन हंस पड़ी. थोड़ी देर बाद भुवा ने कहा सुमन तुम खाना खा कर खेत मैं खाद डाल आना. मैं थोड़ा आराम करूँगी. हम सब ने खाना खाया सुमन बर्तन धो कर खेत मैं खाद डालने लगी. मैं और भुवा चटाई बिच्छा कर आराम करने लगे.

मुझे नींद नहीं आरही थी. आज मैं भुवा या सुमन को चोदने का विचार बना रहा था. विचार करते करते कब नींद आगयी पता ही नहीं चला. जब मेरी नींद खुली तो शाम के करीब 5 बज रहे थे. मैने देखा कि मेरा मोटा लंड लंड तन कर खड़ा था और लूंघी से बाहर निकल कर मुझे सलामी दे रहा था. इतने में भुवा कमरे मैं आई मैने झट से आँखे बंद कर ली. थोड़ी देर बाद थोड़ी आँख खोल कर देखा कि भुवा की नज़र मेरे खड़े हुवे मोटे लंड पर टिकी थी.


हैरत भरी निगाहों से मेर लंबे और मोटे लंड को देख रही थी. कुच्छ देर बाद उन्होने आवाज़ दे कर कहा “दीनू बेटा उठ जाओ अब घर चलना है” मैने कहा ठीक है और उठकर बैठ गया मेरा लंड अब भी लूँगी से बाहर था. भुवा मेरी ओर देखते हुवे बोली “दीनू बेटा क्या तुमने कोई बुरा सपना देखा था क्या ? मैं मुस्किल से कहा नहीं तो भुवा, क्यों क्या हुवा. वो बोली नीचे तो देखो क्या दिख रहा हैं.


जब मैने नीचे देखा तो मेरा लंड लूँगी से निकला हुआ था. मैं शरम से लाल हो कर अपना लंड अंडरवेर मैं छुपा लिया. ऐसा करते समय भुवा हंस रही थी. हम करीब 6:30 बजे घर पहुँचे. रास्ते भर कोई भी बात चीत नहीं हुई. घर आकर मैने कहा कि मैं बाज़ार होके आता हूँ और फिर बाज़ार जाकर 1 व्हिस्की की बॉटल ले आया.

जब घर पहुँचा तो रात के 9 बज रहे थे.मुझे आया देख कर भुवा ने आवाज़ दी बेटा आकर खाना ख़ालो मैं बोला भुवा अभी भूक नहीं हैं थोड़ी देर बाद खा लूँगा. फिर मैने पुछा मा और सुमन कहाँ हैं (क्योंकि मा और सुमन ना तो रसोई घर में थे नहीं आगन में थे) भुवा ने कहा कि हमारे रिस्तेदार के यहाँ आज रात भर भजन और कीर्तन हैं इसलिए भाभी और सुमन रिस्तेदार के यहाँ गये हैं और सुबह 5-6 बजे लोटेंगे.


मैने कहा “ठीक हैं भुवा, अगर आप बुरा ना मानो तो क्या मैं थोड़ी विश्की पी सकता हूँ ? भाभी बोली “ठीक हैं तुम आँगन में बैठो मैं वहीं खाना लेकर आती हूँ. मैं आँगन में बैठ कर विशकी पीने लगा. करीब आधे घंटे बादभुवा खाना लेकर आई तब तक मैं 3-4 पेग पी चुक्का था और मुझे थोडा विशकी का नशा होने लगा था.


भुवा और मैं खाना खाने के बाद, भुवा के कमरे में आ गये. मैने पॅंट को शर्ट निकाल कर लूँगी और बनियान पहन ली. भुवा ने भी सारी खोल कर केवल नाइटी पहनी हुई थी. जब भुवा खड़ी होकर पानी लाने गयी तो मुझे उनकी पारदर्शी नाइटी से उनका सरीर दिखाई दिया. उन्होने नाइटी के अंदर ना तो ब्लाउस पहना था नहीं पेटिकोट पहना था इसलिए लाइट की रोसनी के कारण उनका जिस्म नाइटी से झलक रहा था. जब वो पानी लेकर वापस आई. हम बैठ कर बातें करने लगे.

भुवा: दीनू क्या तुम सहर में कसरत करते हो ?

दीनू: हां भुवा रोज सुबहा उठकर कसरत करता हूँ.

भूवजि: इसलिए तुम्हारा एक एक अंग काफ़ी तगड़ा और तंदूरस्त हैं. क्या तुम अपने बदन पर तेल लगा कर मालिश करते हो खास तोर पर सरीर के निचले हिसें पर ?

दीनू: मैं हर रोज़ अपने बदन पर सरसों का तेल लगा कर खूब मालिश करता हूँ.

भुवा: हां आज मैने तुम्हारे सरीर के अलावा अंदर का अंग भी दोपहर को देखा था वाकई काफ़ी मोटा लंबा और तंदूरस्त है. हर मर्द का इस तरह का नहीं होता हैं.


भुवा की बात सुन कर मैं शरम के मारे लाल हो गया. पूरे मकान मैं हम दोनो अकेले थे. और इसतरह की बातें कर रहे थे.


मैने भी भुवा की से कहा. भुवा आप भी बहुत सुंदर हो और आपका बदन भी सुडोल है.


भुवा: दीनू मुझे ताड़ के झाड़ पर मत चढ़ाओ. तुमने तो अभी मेरा बदन पूरी तरह देखा ही कहाँ हैं. मैने बोला आप ने तो मुझे दिखाया ही नहीं और मेरे सरीर के निचले हिस्से का दर्शन भी कर लिया. इतना सुनते ही वो झट बोली मुझे कहाँ अच्छी तरह कहाँ तुम्हारे दर्शन हुए. चलो एक शर्त पर तुम्हे मेरे अंदुरूनी भाग दिखा दूँगी अगर तुम मुझे अपना दिखाओगे तो ?


मैने झट से लूँगी से लंड निकाल कर उन्हे दिखा दिया. भुवा ने भी अपने वादे के अनुसार नाइटी उपर कर के अपनी चूत दिखा दी और मुस्कराती बोली राजा बेटा खुश हो अब. हाई जालिम चूत थी. चूत देखते ही मेरा लंड तन कर फरफारने लगा. कुछ देर तक मेरे लंड की ओर देखने के बाद भुवा मेरे पास आई और झट से मेरी लूँगी खोल दी.


फिर खड़े होकर अपनी नाइटी भी उतार दी और नंगी हो गयी. फिर मुझे कुर्सी से उठ कर पलंग पर बैठने को कहा. जब मैं पलंग पर बैठ कर भुवा की मस्त रसीली चूंची को देख रहा था तो मारे मस्ती के मेरा लंड छत की ओर मुँह उठाए उनकी चूत को सलामी देरहा था.


भुवा मेरी जाँघो के बीच बैठ कर दोनो हाथों से मेरे लौरे को सहलाने लगी. कुछ देर यूँही सहलाने के बाद अचानक भाभी ने अपना सर नीचे झुकाया और अपने रसीले होंटो से मेरे सुपारे को चूम कर उसको मुँह मे भर लिया. मैं एकदम चौंक गया. मैने सपने मे भी नही सोचा था कि ऐसा होगा.


“भुवा ये क्या कर रही हो. मेरा लंड तुमने मुँह मे क्यों ले लिया है.” “चूसने के लिए और किस लिए? तुम आराम से बैठे रहो और बस लंड चुसाइ का मज़ा लो. एक बार चुस्वा लोगे फिर बार-बार चूसने को कहोगे.” भुवा मेरे लंड को लॉलिपोप की तरह मुँह ले लेकर चूसने लगी.मैं बता नही सकता हूँ कि लंड चुसवाने मे मुझे कितना मज़ा आ रहा था. भुवा के रसीले होन्ट मेरे लंड को रगर रहे थे.

फिर भुवा ने अपने होन्ट गोल कर के मेरा पूरा लंड अपने मुँह मे लेलिया और मेरे आंडो को हथेली से सहलाते हुए सिर उपर नीचे करना शुरू कर दिया मानो वो मुँह से ही मेरा लंड को चोद रही हो. धीरे-धीरे मैने भी अपनी कमर हिला कर भुवा के मुँह को चोदना शुरू कर दिया. मैं तो मानो सातवें आसमान पर था.


बेताबी तो सुबह से ही हो रही थी. थोरी ही देर मे लगा कि मेरा लंड अब पानी छोड़ देगा. मैं किसी तरह अपने उपर काबू कर के बोला, “भूवजिीइईईईई मेरा पानी छूटने वाला है.” भुवा ने मेरे बातों का कुछ ध्यान नही दिया बाल्की अपने हाथो से मेरे चूतर को जाकड़ कर और तेज़ी से सिर उपर-नीचे करना शुरू कर दिया. मैं भी उनके सिर को कस कर पकड़ कर और तेज़ी से लंड उनके मुँह मे पेलने लगा.


कुछ ही देर बाद मेरे लंड ने पानी छोड़ दिया और भुवा गतगत करके पूरे पानी पी गयी. सुबह से काबू मे रखा हुआ मेरा पानी इतना तेज़ी से निकला कि उनके मुँह से बाहर निकल कर उनके तोड़ी पर फैल गया. कुछ बूंदे तो टपक कर उनकी चूंची पर भी जा गिरी. झरने के बाद मेने अपना लंड निकाल कर भुवा के गाल्लो पर रगड़ दिया. क्या खूबसूरत नज़ारा था. मेरा वीर्य भुवा के मुँह गाल होन्ट और रसीली चूंची पर चमक रहा था.

Nitin
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Re: दोस्त का परिवार compleet family sex story

Unread post by Nitin » 26 Apr 2018 09:32

भुवा ने अपनी गुलाबी जीभ अपने होटो पर फिरा कर वान्हा लगा वीर्य चाता और फिर अपनी हथेली से अपनी चूंची को मसल्ते हुए पूछा, “क्यों दीनू बेटा मज़ा आया लंड चुसवाने मे?” मैं बोला “बहुत मज़ा आया भुवा, तुमने तो एक दूसरी जन्नत की सैर करवा दिया मेरी जान. आज तो मैं तुम्हारा सात जन्मो के लिए गुलाम हो गया. कहो क्या हुक्म है.” भुवा बोली“हुक्म क्या, बस अब तुम्हारी बारी है.”


मैं कहा “क्या मतलब, मैं कुछ समझा नही?” भुवा बोली “मतलब ये कि अब तुम मेरी चूत चॅटो.” एह कहा कर भुवा खड़ी हो गयी और अपनी चूत मेरे चहेरे के पास ले आई. मेरे होन्ट उनकी चूत के होंटो को छूने लगी. भुवा ने मेरे सिर को पकड़ कर अपनी कमर आगे की और अपनी चूत मेरे नाक पर रगर्ने लगी. मैने भी उनकी चूतर को दोनो हाथो से पकड़ लिया और उनकी गंद सहलाते हुए उनकी रसीली चूत को चूमने लगा.


भुवा की चूत की प्यारी-प्यारी खुसबु मेरे दिमाग़ मे छाने लगी. मैं दीवानो की तरह उनकी चूत और उसके चारो तरफ के इलाक़े को चूमने लगा. बीच-बीच मे मैं अपनी जीभ निकाल कर उनकी रानो को भी चॅट लेता. भुवा मस्ती से भर कर सिसकारी लेते हुए अपनी चूत को फैलाते हुए बोली, “हाई राजा अहह! जीभ से चॅटो ना. अब और मत तरपाओ राजा. मेरी बुर को चॅटो.


डाल दो अपनी जीभ मेरी चूत के अंदर. अंदर डाल कर जीभ से चोदो.” अब तक उनकी नशीली चूत की खुसबू ने मुझे बुरी तरह से पागल बना दिया था. मैने उनकी चूत पर से मुँह उठाए बिना उन्हे खींच कर पलंग पर बैठा दिया और उनकी जाँघो को फैला कर अपने दोनो कंधों पर रख लिया और फिर आगे बढ़ कर उनकी चूत के होंटो को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया. भुवा मस्ती से बड़बड़ाने लगी और अपनी चूतर को और आगे खिसका कर अपनी चूत को मेरे मुँह से बिल्कुल सटा दिया.


अब भुवा के चूतर पलंग से बाहर हवा मे झूल रहे थे और उनकी मखमली जांघों का पूरा दबाब मेरे कंधों पर था. मैने अपनी जीभ पूरी की पूरी उनकी चूत मे डाल दी और चूत की अन्द्रुनी दीवालों को जीभ से सहलाने लगा. भुवा मस्ती से तिलमिला उठी और अपने चूतर उठा उठा कर अपनी चूत मेरी जीभ पर दबाने लगी. “हाई राजा, क्या मज़ा आ रहा है.


अब अपनी जीभ को अंदर-बाहर करो नाआअ! चोदो रजाआअ चोदूऊओ! अपनी जीभ से चोदो मुझे. हाई राजा तुम ही तो मेरे असली सैयाँ हो. पहले क्यों नही मिले, अब सारी कसर नीकालूंगी. हाई राजा चोदो मेरी चूत को अपनी जीभ से.” मुझे भी पूरा जोश आ गया और भुवा की चूत मे जल्दी जल्दी जीभ अंदर-बाहर करते हुए उसे चोदने लगा. भुवा अभी भी ज़ोर-ज़ोर से कमर उठा कर मेरे मुँह को चोद रही थी.

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